विज़न 2047 के तहत भारत की सतत और समावेशी पर्यटन रणनीति

विज़न 2047 के तहत भारत की सतत और समावेशी पर्यटन रणनीति

भारत सरकार देश के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जर्मनी के बर्लिन में आयोजित यूएन टूरिज्म मंत्रियों के शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की इस रणनीति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का पर्यटन विकास “जिम्मेदारी के साथ विकास” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है। विज़न 2047 के तहत भारत का लक्ष्य ऐसा पर्यटन तंत्र विकसित करना है जो टिकाऊ, समावेशी और स्थानीय समुदायों के लिए लाभकारी हो।

विज़न 2047 के तहत पर्यटन विकास की रणनीति

विज़न 2047 के अंतर्गत भारत को एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की योजना तैयार की गई है। सरकार का ध्यान केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने पर भी है।

इस रणनीति के तहत संतुलित विकास पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों और संवेदनशील प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी शामिल है। इससे पर्यटन क्षेत्र को दीर्घकालिक और टिकाऊ दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।

कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे का विस्तार

पर्यटन क्षेत्र के विकास में बेहतर कनेक्टिविटी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पिछले एक दशक में भारत में संचालित हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 160 से अधिक हो गई है, जिससे दूरस्थ और उभरते पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो गई है।

क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए उड़ान योजना लागू की गई है, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों और कस्बों के लिए हवाई यात्रा को सस्ता और सुलभ बनाना है। इसके साथ ही आधुनिक रेल सेवाएं जैसे वंदे भारत एक्सप्रेस विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर पर्यटन मार्गों को अधिक सुगम बना रही हैं।

पर्यटन विकास के लिए सरकारी पहल

भारत सरकार ने पर्यटन अवसंरचना और गंतव्य विकास को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत देश भर में थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए जा रहे हैं, जिससे पर्यटकों को विविध सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का अनुभव मिल सके।

इसके अलावा, प्रसाद योजना का उद्देश्य प्रमुख तीर्थ स्थलों का पुनर्विकास और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार न केवल पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बना रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि पर्यटन से स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ प्राप्त हो।

वैश्विक पर्यटन सहयोग में भारत की भूमिका

भारत वैश्विक पर्यटन सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर्यटन को आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम मानता है।

सरकार का प्रयास है कि पर्यटन को केवल एक उद्योग के रूप में नहीं बल्कि एक ऐसे क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए जो रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को एक साथ आगे बढ़ाए। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारत पर्यटन क्षेत्र में साझा समृद्धि और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना का उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना और हवाई यात्रा को सस्ता बनाना है।
  • स्वदेश दर्शन योजना भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है, जिसके तहत थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए जाते हैं।
  • प्रसाद योजना का पूरा नाम पिलग्रिमेज रीजुवेनेशन एंड स्पिरिचुअल हेरिटेज ऑगमेंटेशन ड्राइव है।
  • आईटीबी बर्लिन विश्व के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यापार मेलों में से एक माना जाता है।

भारत की यह पर्यटन रणनीति आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। विज़न 2047 के तहत देश का लक्ष्य ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करना है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।

Originally written on March 5, 2026 and last modified on March 5, 2026.

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