वायुशक्ति-26: भारतीय वायुसेना की सामरिक ताकत और आत्मनिर्भर क्षमता का प्रदर्शन

वायुशक्ति-26: भारतीय वायुसेना की सामरिक ताकत और आत्मनिर्भर क्षमता का प्रदर्शन

भारतीय वायुसेना 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के पोखरण एयर-टू-ग्राउंड रेंज में ‘एक्सरसाइज वायुशक्ति-26’ का आयोजन करेगी। यह व्यापक अग्नि शक्ति प्रदर्शन देश की पहली, सबसे तेज और सबसे प्रभावी प्रतिक्रिया देने वाली सैन्य शक्ति के रूप में वायुसेना की तत्परता को प्रदर्शित करेगा। इस अभ्यास का उद्देश्य तीव्र प्रतिक्रिया क्षमता, सटीक प्रहार शक्ति और उच्च तीव्रता वाले युद्ध परिदृश्यों में संचालनात्मक प्रभुत्व को दर्शाना है।

व्यापक हवाई युद्ध प्रदर्शन

वायुशक्ति-26 में लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म सहित पूर्ण स्पेक्ट्रम ऑपरेशंस का प्रदर्शन किया जाएगा। अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों में Tejas, Rafale, Jaguar, Mirage-2000, Sukhoi-30MKI, MiG-29 और Hawk शामिल होंगे, जो समन्वित स्ट्राइक मिशनों को अंजाम देंगे।

रणनीतिक और सामरिक एयरलिफ्ट प्लेटफॉर्म जैसे C-130J Super Hercules, C-295 और C-17 Globemaster III तीव्र गतिशीलता अभियानों का प्रदर्शन करेंगे। रोटरी विंग संसाधनों में Chetak, ALH Dhruv MK-IV, Mi-17 IV, Light Combat Helicopter, AH-64 Apache और CH-47 Chinook शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट निगरानी और सटीक हमलों को अंजाम देंगे।

आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन

इस अभ्यास में आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन होगा। इनमें शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन, Akash सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, Spyder वायु रक्षा प्रणाली और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम शामिल हैं। अभ्यास दिन, सांध्य और रात्रि परिस्थितियों में संचालित किया जाएगा, जिससे वास्तविक युद्ध जैसे वातावरण का अनुकरण किया जा सके।

यह अभ्यास ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की संचालनात्मक उपलब्धियों को भी रेखांकित करेगा, जिसमें लंबी दूरी की सटीक लक्ष्यभेदन क्षमता और बहु-आयामी युद्ध कौशल का प्रदर्शन शामिल है।

मानवीय सहायता और रणनीतिक भूमिका

वायुशक्ति-26 केवल युद्ध क्षमता का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन में वायुसेना की भूमिका को भी दर्शाएगा। इसमें त्वरित एयरलिफ्ट, निकासी और बचाव अभियानों का प्रदर्शन किया जाएगा। भारत और विदेशों में आपदा की स्थिति में राहत पहुंचाने की क्षमता वायुसेना की दोहरी भूमिका—सैन्य और नागरिक—को सशक्त बनाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एक्सरसाइज वायुशक्ति का आयोजन राजस्थान के पोखरण एयर-टू-ग्राउंड रेंज में किया जाता है।
  • आकाश मिसाइल प्रणाली स्वदेशी रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली है।
  • राफेल और सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना के प्रमुख अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान हैं।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का उद्देश्य रक्षा निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है।

समग्र रूप से, वायुशक्ति-26 भारतीय वायुसेना की सामरिक तैयारी, तकनीकी श्रेष्ठता और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का सशक्त प्रदर्शन है। “अचूक, अभेद्य और सटीक” मूल्यों के मार्गदर्शन में यह अभ्यास राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में वायुसेना की केंद्रीय भूमिका को पुनः स्थापित करता है और देश को उसकी वायु शक्ति पर विश्वास दिलाता है।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

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