वामपंथी दिग्गज आर. नल्लाकन्नु का निधन, सादगी और जनसेवा का एक युग समाप्त
तमिलनाडु के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता आर. नल्लाकन्नु का 101 वर्ष की आयु में चेन्नई में निधन हो गया। बहु-अंग विफलता के कारण उन्होंने दोपहर 1:55 बजे राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां वे फरवरी की शुरुआत से गहन चिकित्सा में भर्ती थे। उनके निधन के साथ सार्वजनिक जीवन और वैचारिक प्रतिबद्धता से भरे एक शताब्दी लंबे जीवन का समापन हुआ।
अंतिम दिन और चिकित्सकीय उपचार
नल्लाकन्नु को 1 फरवरी को स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के बाद अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम लगातार उनकी स्थिति की निगरानी कर रही थी। पिछले कुछ दिनों में उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उपचार का अपेक्षित सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा और उनकी स्थिति गंभीर होती चली गई।
उनके निधन की खबर के बाद तमिलनाडु भर में राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
दशकों का राजनीतिक समर्पण
आर. नल्लाकन्नु तमिलनाडु में कम्युनिस्ट आंदोलन के सबसे सम्मानित चेहरों में से एक थे। सादगी, ईमानदारी और जमीनी स्तर पर सक्रियता के लिए वे व्यापक रूप से जाने जाते थे। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वे किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के मुद्दों से जुड़े रहे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने राज्य में संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका राजनीतिक जीवन स्वतंत्रता-पूर्व और स्वतंत्रता-उपरांत दोनों कालखंडों तक फैला रहा, जो कई पीढ़ियों तक निरंतर वैचारिक प्रतिबद्धता का दुर्लभ उदाहरण है।
सादगी और जनसेवा की विरासत
नल्लाकन्नु अपने सादे जीवन और सार्वजनिक मुद्दों के प्रति अटूट समर्पण के लिए प्रसिद्ध थे। उन्नत आयु में भी वे सामाजिक विषयों और जनहित के प्रश्नों पर सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभाते रहे। समकालीन नेताओं ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और नैतिकता का प्रतीक बताया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1925 में हुई थी।
- राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल चेन्नई में स्थित भारत के सबसे पुराने सार्वजनिक अस्पतालों में से एक है।
- भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन ऐतिहासिक रूप से भूमि सुधार और श्रमिक अधिकारों पर केंद्रित रहा है।
- द्रविड़ दलों के प्रभुत्व के बावजूद तमिलनाडु में वामपंथ की उल्लेखनीय उपस्थिति रही है।
आर. नल्लाकन्नु के निधन के साथ तमिलनाडु की राजनीति ने एक ऐसे वरिष्ठ नेता को खो दिया, जो अनुशासन, वैचारिक दृढ़ता और सेवा-भावना का प्रतीक थे। उनका जीवन स्वतंत्र भारत में वामपंथी आंदोलनों के विकास और सामाजिक न्याय की सतत खोज का सशक्त उदाहरण बना रहेगा।