वांघमुन गांव बना जल संरक्षण का सफल मॉडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के नवीनतम एपिसोड में त्रिपुरा के वांघमुन गांव की सराहना की, जिसने सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण और सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। जंपुई हिल्स में स्थित यह गांव अब जल संकट से उबरकर एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।
वांघमुन की परिवर्तन यात्रा
करीब 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित वांघमुन गांव पहले पानी की गंभीर कमी से जूझता था, खासकर गर्मियों में स्थिति और भी खराब हो जाती थी। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण जल स्रोत सीमित थे और लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन अब इस गांव ने छतों पर वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग) प्रणाली को अपनाकर इस समस्या का प्रभावी समाधान कर लिया है।
सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
इस सफलता के पीछे गांव के लोगों की सक्रिय भागीदारी प्रमुख कारण रही है। लगभग 300 परिवारों ने मिलकर वर्षा जल संचयन को अपनाया और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाया। जागरूकता अभियानों और सामूहिक प्रयासों ने लोगों को इस दिशा में प्रेरित किया, जिससे एक पुरानी समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सका।
प्रशासनिक सहयोग और नेतृत्व
स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय के ब्लॉक विकास अधिकारी असीत कुमार दास, जो वर्तमान में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट हैं, ने इस परियोजना में समन्वय और जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने इस उपलब्धि को राज्य और गांव के लिए गर्व का विषय बताया।
सतत विकास में महत्व
वांघमुन गांव का यह मॉडल दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर सामुदायिक प्रयासों से बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है। यह पहल सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक है और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री का मासिक रेडियो कार्यक्रम है।
- वर्षा जल संचयन जल संरक्षण का एक प्रभावी और सरल तरीका है।
- त्रिपुरा भारत का एक पूर्वोत्तर राज्य है, जहां पहाड़ी क्षेत्र और अधिक वर्षा होती है।
- सामुदायिक भागीदारी स्थानीय विकास योजनाओं की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अंततः, वांघमुन गांव की यह सफलता कहानी यह साबित करती है कि जब समुदाय और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तो असंभव लगने वाली समस्याओं का भी समाधान संभव हो जाता है। यह मॉडल देश के अन्य जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए प्रेरणा प्रदान करता है।