वरिष्ठ पत्रकार एच.के. दुआ का निधन
देश के वरिष्ठ पत्रकार और पद्म भूषण से सम्मानित हर्किशन सिंह दुआ (एच.के. दुआ) का 4 मार्च 2026 को नई दिल्ली में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार के अनुसार वे पिछले लगभग तीन सप्ताह से एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे, जहां बीमारी के बाद उनका उपचार चल रहा था। उनका अंतिम संस्कार 5 मार्च को नई दिल्ली के लोदी रोड श्मशान घाट में किया जाएगा।
एच.के. दुआ भारतीय पत्रकारिता के उन प्रमुख नामों में शामिल थे जिन्होंने कई दशकों तक मीडिया जगत में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे संपादकीय स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पेशेवर ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। अपने लंबे करियर में उन्होंने भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता को मजबूत करने और लोकतांत्रिक विमर्श को दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पत्रकारिता में उल्लेखनीय करियर
एच.के. दुआ ने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में देश के कई प्रमुख समाचार पत्रों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर कार्य किया। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के साथ काम किया। उनकी राजनीतिक विश्लेषण क्षमता और सशक्त संपादकीय नेतृत्व के कारण उन्हें व्यापक सम्मान मिला।
वर्ष 2003 से 2009 तक वे ‘द ट्रिब्यून’ के प्रधान संपादक रहे। उनके कार्यकाल में यह अखबार राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बना तथा शासन, लोकतंत्र और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर मजबूत संपादकीय रुख के लिए जाना गया। उनके लेख और विश्लेषण नीति-निर्माताओं तथा पाठकों दोनों के बीच गंभीरता से पढ़े जाते थे।
सरकार और कूटनीति में भूमिका
पत्रकारिता के अलावा एच.के. दुआ ने सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और अटल बिहारी वाजपेयी के मीडिया सलाहकार रहे। इस दौरान उन्होंने सरकार की संचार रणनीतियों को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने भारत के राजदूत के रूप में डेनमार्क में भी सेवा दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह जिम्मेदारी उनके अनुभव, कूटनीतिक समझ और सार्वजनिक मामलों की गहरी जानकारी का प्रमाण मानी जाती है।
सम्मान और संसदीय योगदान
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है।
इसके बाद वर्ष 2009 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया। संसद के उच्च सदन में उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और सार्वजनिक नीति से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से अपनी बात रखी। उनके निधन पर कई राजनीतिक नेताओं और पत्रकारों ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें सिद्धांतों पर आधारित पत्रकारिता का प्रतीक बताया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसकी स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।
- राज्यसभा में कुछ सदस्यों को साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में योगदान के आधार पर नामित किया जाता है।
- नई दिल्ली का लोदी रोड श्मशान घाट राष्ट्रीय स्तर के कई प्रमुख व्यक्तित्वों के अंतिम संस्कार के लिए जाना जाता है।
- ‘द ट्रिब्यून’ भारत का एक प्रमुख अंग्रेजी भाषा का समाचार पत्र है, जिसका मुख्यालय चंडीगढ़ में स्थित है।
एच.के. दुआ का जीवन पत्रकारिता में सिद्धांत, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है। प्रमुख समाचार पत्रों में उनकी संपादकीय भूमिका, सरकारी सलाहकार के रूप में उनकी सेवाएं और संसद में उनका योगदान भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा।