वरिष्ठ अभिनेत्री प्रवीना देशपांडे का निधन, फिल्म और टीवी जगत में शोक
फिल्म, टेलीविजन और रंगमंच की जानी-मानी अभिनेत्री प्रवीना देशपांडे का 17 फरवरी को कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया। वह 60 वर्ष की थीं। उनके परिवार ने आधिकारिक सोशल मीडिया खाते के माध्यम से उनके निधन की पुष्टि की और बताया कि अंतिम संस्कार उसी दिन मुंबई के अंधेरी पूर्व स्थित हिंदू श्मशान घाट, चकाला पारसीवाड़ा में संपन्न हुआ। उनके निधन से मनोरंजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और सहकर्मियों तथा विभिन्न संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
फिल्म और टेलीविजन में बहुआयामी करियर
प्रवीना देशपांडे ने हिंदी और मराठी सिनेमा में एक सशक्त सहायक अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बनाई। हिंदी फिल्मों में उन्होंने Ready, Ek Villain और Parmanu: The Story of Pokhran जैसी फिल्मों में प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं। इन फिल्मों में उनकी सशक्त उपस्थिति और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
टेलीविजन पर भी वह एक परिचित चेहरा रहीं। उन्होंने ‘घर एक मंदिर’, ‘कुमकुम’, ‘करम अपना अपना’ और ‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में अभिनय किया। रंगमंच और वेब श्रृंखलाओं में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही, जिससे उनकी अभिनय क्षमता और बहुमुखी प्रतिभा का परिचय मिलता है।
अंतिम स्क्रीन उपस्थिति और उद्योग की श्रद्धांजलि
उनकी अंतिम स्क्रीन उपस्थिति वेब श्रृंखला ‘टास्करी’ में रही, जिसमें अभिनेता इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में थे। Cine & TV Artistes’ Association, जिसकी वह वर्ष 2008 से सदस्य थीं, ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया।
सहायक भूमिकाओं में भी उन्होंने भावनात्मक गहराई और सशक्त प्रस्तुति के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। चाहे मातृत्व की भूमिका हो, किसी अधिकारपूर्ण चरित्र का चित्रण हो या जटिल भावनात्मक परिस्थितियां—उन्होंने हर किरदार को संवेदनशीलता और गरिमा के साथ निभाया।
सहायक भूमिकाओं में विरासत
प्रवीना देशपांडे को एक विश्वसनीय और समर्पित कलाकार के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अपने लंबे करियर में पेशेवर प्रतिबद्धता और निरंतरता बनाए रखी। उनके अभिनय में सहजता और स्थिरता दिखाई देती थी, जिसने उन्हें फिल्म और टीवी जगत में सम्मान दिलाया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) भारत में फिल्म और टेलीविजन कलाकारों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है।
* मुंबई को हिंदी फिल्म उद्योग का केंद्र माना जाता है, जिसे आमतौर पर बॉलीवुड कहा जाता है।
* ‘परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण’ वर्ष 1998 के भारत के परमाणु परीक्षणों पर आधारित फिल्म है।
* भारतीय मनोरंजन उद्योग में फिल्म, टेलीविजन, रंगमंच और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
प्रवीना देशपांडे का करियर इस बात का उदाहरण है कि सशक्त सहायक भूमिकाएं किसी भी कहानी को गहराई और विश्वसनीयता प्रदान करती हैं। उनका निधन भारतीय मनोरंजन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, किंतु उनका सृजनात्मक योगदान लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।