‘वंदे मातरम्’ के छहों स्तोत्र अनिवार्य: केंद्र ने जारी किए नए दिशानिर्देश

‘वंदे मातरम्’ के छहों स्तोत्र अनिवार्य: केंद्र ने जारी किए नए दिशानिर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 फरवरी 2026 को नए दिशानिर्देश जारी करते हुए आदेश दिया है कि ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह स्तोत्र सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में गाए या बजाए जाएं। यह निर्णय गीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लिया गया है। अब तक आधिकारिक आयोजनों में सामान्यतः केवल पहले दो स्तोत्र ही गाए जाते थे, लेकिन संशोधित निर्देशों में पूर्ण संस्करण को “आधिकारिक संस्करण” के रूप में परिभाषित किया गया है।

आधिकारिक संस्करण और अवधि निर्धारित

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ‘वंदे मातरम्’ के छहों स्तोत्रों का गायन या वादन कुल 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि में किया जाएगा। जब भी राष्ट्रीय गीत बजाया जाएगा, उपस्थित सभी व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।

हालांकि, यदि यह गीत किसी फिल्म या समाचार रील के हिस्से के रूप में सिनेमा हॉल में प्रस्तुत होता है, तो वहां खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा, ताकि दर्शकों को असुविधा न हो। यह प्रावधान सार्वजनिक व्यवस्था और दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखकर जोड़ा गया है।

किन अवसरों पर अनिवार्य होगा गायन

नए निर्देशों के अनुसार, जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाएगा, तब ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा। राष्ट्रपति द्वारा भाग लिए जाने वाले सभी नागरिक सम्मान समारोहों और आधिकारिक राज्य कार्यक्रमों में भी इसे अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान दोनों अवसरों पर गीत बजाया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति के संबोधन के पहले और बाद में, जो आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे सरकारी माध्यमों से प्रसारित होते हैं, राष्ट्रीय गीत का वादन किया जाएगा। राज्यों में राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन और प्रस्थान पर भी इसे बजाने का निर्देश दिया गया है।

देशभर के विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन शामिल करना अनिवार्य किया गया है।

औपचारिक प्रोटोकॉल और प्रस्तुति के नियम

मंत्रालय ने गीत की प्रस्तुति के लिए विस्तृत औपचारिक निर्देश भी जारी किए हैं। बैंड द्वारा वादन से पूर्व मृदंग या ट्रंपेट जैसे वाद्य यंत्रों से ड्रमरोल किया जाएगा। मार्चिंग ड्रिल में गीत की शुरुआत से पहले सात कदम की औपचारिक चाल निर्धारित की गई है।

इन निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मान और प्रस्तुति में एकरूपता सुनिश्चित करना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ‘वंदे मातरम्’ की रचना Bankim Chandra Chatterjee ने 19वीं शताब्दी में की थी।
  • यह गीत 1882 में प्रकाशित उपन्यास Anandamath में पहली बार प्रकाशित हुआ था।
  • पूर्व में आधिकारिक रूप से केवल पहले दो स्तोत्रों का उपयोग किया जाता था।
  • राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ अलग-अलग संवैधानिक स्थिति रखते हैं।

समग्र रूप से, यह नया निर्देश राष्ट्रीय गीत की औपचारिक और सांस्कृतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया गया कदम है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने राष्ट्रवादी भावना को प्रेरित किया था, और अब इसके 150वें वर्ष में सरकार इसे सार्वजनिक जीवन में अधिक व्यापक और मानकीकृत रूप में स्थापित करना चाहती है।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *