लेबनान की बेक्का घाटी में इज़रायली हमले से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
पूर्वी लेबनान की बेक्का घाटी में हालिया इज़रायली हवाई हमलों में कम से कम 12 लोगों की मृत्यु और 20 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने की है। ये हमले हाल के सप्ताहों में सबसे घातक माने जा रहे हैं और उन्होंने 2024 में स्थापित नाजुक युद्धविराम पर गंभीर दबाव डाल दिया है। इज़रायल का दावा है कि हमलों का लक्ष्य हिज़्बुल्लाह से जुड़े ठिकाने थे, जबकि लेबनान ने नागरिक हताहतों की आशंका जताई है।
बेक्का घाटी में घातक कार्रवाई
बेक्का घाटी, जो लेबनान के पूर्वी हिस्से में सीरिया की सीमा से सटी है, लंबे समय से हिज़्बुल्लाह का प्रभाव क्षेत्र मानी जाती है। इज़रायली सेना के अनुसार, यहां “कमांड सेंटर” को निशाना बनाया गया। स्थानीय मीडिया फुटेज में एक आवासीय इमारत को भारी क्षति और मलबे में राहत दलों की गतिविधियां देखी गईं।
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हुसैन यागी नामक हिज़्बुल्लाह के एक वरिष्ठ सदस्य की भी इस हमले में मृत्यु हुई। वे पूर्व सांसद मोहम्मद यागी के पुत्र थे। हिज़्बुल्लाह से जुड़े मीडिया माध्यमों ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की और अंतिम संस्कार की घोषणा की। इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है।
2024 का युद्धविराम और बढ़ता दबाव
इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच 2024 में अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच एक वर्ष से अधिक समय तक सीमा-पार झड़पें होती रहीं, जो गाजा संघर्ष से जुड़े क्षेत्रीय तनाव के बाद और तीव्र हो गई थीं। हालांकि युद्धविराम के बाद भी दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं।
इज़रायल का आरोप है कि हिज़्बुल्लाह ने दक्षिणी और पूर्वी लेबनान में अपनी सैन्य क्षमताएं बरकरार रखी हैं। दूसरी ओर, लेबनानी नेतृत्व का कहना है कि इज़रायली हमले देश को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। अमेरिका ने बेरूत पर हिज़्बुल्लाह के शस्त्रागार को नियंत्रित करने का दबाव डाला है, जो लेबनान की आंतरिक राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
सैदोन के शरणार्थी शिविर पर हमला
उसी दिन इज़रायल ने बंदरगाह शहर सैदोन के निकट स्थित ऐन अल-हिलवे फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर पर भी हमला किया, जिसमें दो लोगों की मृत्यु हुई। इज़रायल ने दावा किया कि यह हमास का कमांड सेंटर था। हालांकि हमास ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह इमारत विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों की संयुक्त सुरक्षा इकाई का केंद्र थी, जो शिविर की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थी।
यह घटना दर्शाती है कि संघर्ष केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* बेक्का घाटी लेबनान के पूर्वी भाग में स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है, जो सीरिया की सीमा से लगा हुआ है।
* हिज़्बुल्लाह एक शिया इस्लामी राजनीतिक और उग्रवादी संगठन है, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है।
* ऐन अल-हिलवे लेबनान का सबसे बड़ा फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर है, जो सैदोन के पास स्थित है।
* 2024 में इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच हुआ युद्धविराम अमेरिका की मध्यस्थता से संपन्न हुआ था।
वर्तमान घटनाक्रम यह संकेत देता है कि इज़रायल की उत्तरी सीमा पर स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। यदि हमले और प्रतिरोध की यह श्रृंखला जारी रहती है, तो संघर्ष का दायरा और व्यापक हो सकता है। लेबनान, जो पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है, के लिए यह स्थिति और अधिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।