लेट ट्रायसिक काल का नया प्राचीन सरीसृप “सोंसेलासुकस सेड्रस” खोजा गया
वैज्ञानिकों ने एक नई प्राचीन सरीसृप प्रजाति की पहचान की है, जो लगभग 225 से 201 मिलियन वर्ष पहले लेट ट्रायसिक काल में वर्तमान संयुक्त राज्य अमेरिका के क्षेत्र में रहती थी। यह खोज वाशिंगटन विश्वविद्यालय और सिएटल स्थित बर्क म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री एंड कल्चर के जीवाश्म वैज्ञानिकों द्वारा की गई। इस प्रजाति के जीवाश्म एरिज़ोना के पेट्रिफाइड फॉरेस्ट नेशनल पार्क में मिले हैं, जो जीवाश्म लकड़ी और प्रागैतिहासिक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। इस खोज से शुरुआती आर्कोसॉर सरीसृपों के विकास और डायनासोरों के साथ रहने वाली अन्य प्रजातियों की विविधता के बारे में नई जानकारी मिली है।
एरिज़ोना के पेट्रिफाइड फॉरेस्ट नेशनल पार्क में खोज
नई प्रजाति का नाम “सोंसेलासुकस सेड्रस” रखा गया है। इसके जीवाश्म एरिज़ोना के पेट्रिफाइड फॉरेस्ट नेशनल पार्क से प्राप्त हुए, जो ट्रायसिक काल के जीवाश्मों के लिए विश्व प्रसिद्ध क्षेत्र है। वर्ष 2014 से वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति से जुड़े लगभग 950 जीवाश्म नमूने एकत्र किए हैं। इतनी बड़ी संख्या में प्राप्त जीवाश्मों ने शोधकर्ताओं को इसकी शारीरिक संरचना, जीवन शैली और विकास संबंधी विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन करने में मदद की।
शुवोसॉरिड सरीसृप समूह का सदस्य
वैज्ञानिकों ने “सोंसेलासुकस सेड्रस” को शुवोसॉरिड नामक सरीसृप समूह में वर्गीकृत किया है। यह समूह उन प्राचीन आर्कोसॉर सरीसृपों से संबंधित है जिनका विकासक्रम मगरमच्छों के पूर्वजों से जुड़ा माना जाता है। लेट ट्रायसिक काल में रहने वाले इन सरीसृपों का शरीर आकार और बनावट कुछ हद तक पक्षी जैसे दिखाई देते थे। इनकी आकृति कुछ डायनासोर प्रजातियों, विशेष रूप से ऑस्ट्रिच जैसे शरीर वाले ऑर्निथोमिमिड डायनासोर से मिलती-जुलती थी, हालांकि दोनों अलग-अलग विकासीय वंशों से संबंधित थे।
अनोखी शारीरिक संरचना और द्विपाद चाल
शोधकर्ताओं के अनुसार यह सरीसृप आकार में लगभग एक छोटे कुत्ते जितना था और इसकी ऊंचाई लगभग 25 इंच रही होगी। इसके अंगों की हड्डियों के अध्ययन से पता चलता है कि इसके विकास के दौरान शरीर की मुद्रा में बदलाव आया। युवा अवस्था में यह संभवतः चार पैरों पर चलता था, लेकिन जैसे-जैसे यह बड़ा हुआ, इसके पिछले पैर लंबे और मजबूत हो गए और यह दो पैरों पर चलने लगा। इस सरीसृप में बिना दांत वाली चोंच, खोखली हड्डियां और बड़ी आंखों के गड्ढे जैसी विशेषताएं थीं, जो कुछ डायनासोर समूहों में भी देखी जाती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लेट ट्रायसिक काल लगभग 237 से 201 मिलियन वर्ष पहले तक रहा।
- एरिज़ोना का पेट्रिफाइड फॉरेस्ट नेशनल पार्क ट्रायसिक काल के जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध स्थल है।
- शुवोसॉरिड सरीसृप आर्कोसॉर समूह का हिस्सा हैं, जिनका संबंध मगरमच्छों के पूर्वजों से माना जाता है।
- आर्कोसॉर समूह में आधुनिक पक्षी, मगरमच्छ और कई विलुप्त सरीसृप प्रजातियां शामिल हैं।
विकासवादी अनुकूलन की नई समझ
वैज्ञानिकों का मानना है कि शुवोसॉरिड और ऑर्निथोमिमिड डायनासोर के बीच दिखाई देने वाली समानताएं समानांतर विकास (कन्वर्जेंट इवोल्यूशन) का परिणाम हैं। दोनों समूह अलग-अलग वंशों से थे, लेकिन समान पारिस्थितिक परिस्थितियों में रहने के कारण उनके शरीर में मिलती-जुलती विशेषताएं विकसित हुईं। इस खोज से यह भी पता चलता है कि दो पैरों पर चलना, बिना दांत की चोंच, खोखली हड्डियां और बड़ी आंखों के गड्ढे जैसी विशेषताएं केवल डायनासोरों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि मगरमच्छों के पूर्वजों से जुड़े अन्य सरीसृपों में भी विकसित हुई थीं। इससे ट्रायसिक काल में सरीसृपों के विकास की जटिलता को समझने में नई जानकारी मिलती है।