लेक में प्राचीन नावों की खोज: उत्तर अमेरिका के इतिहास को नया आयाम
प्राचीन मानव बस्तियों और जल यात्राओं के अध्ययन में एक अद्वितीय और रोमांचक खोज सामने आई है। उत्तरी अमेरिका के लेक मेंडोटा के नीचले तल से पुरातत्वविदों ने प्राचीन लकड़ी की नौकाओं का एक बड़ा समूह खोजा है, जो हजारों साल पुराने मानव तकनीकी कौशल और सामाजिक जीवन की झलक प्रदान करता है। कार्बन डेटिंग के अनुसार सबसे पुरानी नाव लगभग 5,200 साल पुरानी हो सकती है, जो मिस्र के महान पिरामिड के निर्माण को भी पीछे छोड़ देती है। यह खोज न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राचीन मानव बस्तियों की समझ में भी भारी बदलाव ला सकती है।
शांत झील के नीचे अभूतपूर्व खोज
विस्कॉन्सिन हिस्टोरिकल सोसायटी के सहयोग से मैडिसन के पास लेक मेंडोटा में की गई जल-अधिकारित सर्वेक्षणों के दौरान यह अद्भुत समूह मिला। अब तक शोधकर्ताओं ने तालाब की धूलि पर विश्राम करती 16 प्राचीन ड्यूगआउट नावों की पहचान की है। 2021 में पहली खोज एक लगभग 1,200 साल पुरानी नाव की थी, लेकिन बाद की जांच में यह पता चला कि कुछ नावें उससे भी कहीं अधिक प्राचीन हैं। उम्र अनुमान लगभग 700 से 5,200 वर्षों के बीच है। विशेष रूप से, वर्ष 2025 की वसंत ऋतु में अकेले छह नई नावें खोजी गईं, जिससे इस स्थल के पुरातात्विक मूल्य का मूल्यांकन और बढ़ गया।
दीर्घकालिक और संगठित समुदायों का प्रमाण
इन नावों की संख्या और उम्र के विविध समूह यह संकेत देते हैं कि लेक मेंडोटा के आसपास मानव उपस्थिति अनेक सहस्राब्दियों तक निरंतर बनी रही होगी। पुरातत्वविदों का मानना है कि ये नावें केवल अलग-अलग समय की वस्तुएं नहीं थीं, बल्कि जल-आधारित यात्रा, मत्स्य पालन और संसाधन प्रबंधन के एक सतत ढांचे का हिस्सा थीं।
रोचक रूप से, ये नावें झील के तल में दो अलग-अलग समूहों में स्थित हैं, जो यादृच्छिक रूप से बिखरी हुई नहीं थीं। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि इनका उपयोग सामुदायिक रूप से किया जाता था, न कि केवल व्यक्तिगत स्वामित्व के रूप में। यह प्रारंभिक समाजों की जटिलता, साझेदारी और साझा संसाधनों के प्रबंध की गवाही देता है।
नाव निर्माण में उन्नत सामग्री ज्ञान
नावों के अध्ययन से पता चला कि कई बोटें लाल और सफेद ओक के बड़े वृक्षों से काटी गई थीं। लाल ओक को सामान्यतः जल अवशोषित करने की प्रवृत्ति के कारण पानी में टिकाऊ नहीं माना जाता, लेकिन शोधकर्ताओं को लगा कि प्राचीन शिल्पियों ने उन वृक्षों का चयन किया जिनमें प्राकृतिक आंतरिक संरचनाएं, जिन्हें टायलोसिस (tyloses) कहा जाता है, मौजूद थीं। ये संरचनाएँ लकड़ी में पानी के प्रवेश को कम करती हैं और सड़न की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि शायद शिल्पियों ने स्वयं वृक्षों में वृद्धि के दौरान नुकसान पहुँचाकर इन गुणों को बढ़ावा देने की तकनीक विकसित की हो, जो प्राचीन लोगों की पर्यावरण-आधारित समझ और तकनीकी कौशल का प्रतीक है। यह ज्ञान आधुनिक तकनीकों के समान है, जो यह दर्शाता है कि पहले के समाजों ने प्रकृति की जटिलताओं को समझकर अपने संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ड्यूगआउट नावें जलयान का सबसे प्रारंभिक ज्ञात रूप हैं जिन्हें बड़े पेड़ों की लकड़ी को खोदकर बनाया जाता था।
- कार्बन डेटिंग तकनीक ऑर्गेनिक सामग्री की उम्र निर्धारित करने के लिए प्रयुक्त होती है।
- ग्रेट लेक्स क्षेत्र में प्राचीन मूल निवासी समुदायों के दीर्घकालिक बसे होने के प्रमाण मिले हैं।
- टायलोसिस लकड़ी में कोशिकाओं द्वारा बनायीं जाने वाली संरचनाएं हैं, जो पानी की पारगम्यता को कम करती हैं और सड़न को रोकती हैं।
आदिवासी इतिहास और व्यापक महत्व
शोधकर्ताओं ने इस खोज पर जोर देते हुए कहा है कि यह क्षेत्रीय आदिवासी इतिहास की गहराई को उजागर करती है। इन नावों से पता चलता है कि प्राचीन समुदाय जुड़े हुए थे, उनके बीच यात्रा मार्ग समान थे, मत्स्य पालन के अभ्यास साझा किए जाते थे और तकनीकी ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होता रहा।
आने वाले शोध कार्यों में लेकबेड का विस्तृत मानचित्रण, औज़ारों और नावों की और अधिक सटीक उम्र निर्धारित करना, और यह समझना शामिल होगा कि ये जलयान जीविकोपार्जन, व्यापार और सामाजिक नेटवर्क का कितना समर्थन करते थे, विशेष रूप से उन सहस्राब्दियों में जब लिखित इतिहास अधिकांश विश्व भागों में विकसित नहीं हुआ था। यह खोज हमें प्राचीन मानव समुदायों की जटिलताओं और उनके जीवन के विविध पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने का एक नया दृष्टिकोण देती है।