लिंफेडेमा के उपचार की दिशा में नई कोशिकीय खोज से उम्मीदें बढ़ीं
लिंफेडेमा, एक दीर्घकालिक और पीड़ादायक सूजन संबंधी विकार, जिसका वर्तमान में कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, उसके उपचार की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह रोग तब उत्पन्न होता है जब शरीर की लसीका तंत्र प्रणाली, जो विशेष वाहिकाओं के माध्यम से द्रव का परिवहन करती है, क्षतिग्रस्त हो जाती है। यह जन्मजात हो सकता है या चोट के कारण विकसित हो सकता है, किंतु अधिकांश मामलों में यह स्तन कैंसर उपचार के दौरान लसीका ग्रंथियों को हटाने के बाद विकसित होता है।
द्रव के संचय से लगातार सूजन, असुविधा और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे रोगी के जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
लसीका वाहिका वृद्धि में महत्वपूर्ण खोज
न्यूजीलैंड के ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वाइपापा ताउमाता राउ परिसर के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी कोशिकीय प्रक्रिया की पहचान की है, जो लसीका वाहिकाओं की वृद्धि को प्रोत्साहित करती है। इस अध्ययन का नेतृत्व आणविक चिकित्सा और पैथोलॉजी के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. जोनाथन एस्टिन ने किया।
वैज्ञानिकों ने इस तंत्र का पहला अवलोकन जेब्राफिश में किया, जो जैव-चिकित्सा अनुसंधान में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला मॉडल जीव है। उन्होंने पाया कि इंसुलिन-सदृश वृद्धि कारक (आईजीएफ) नामक अणु लसीका वाहिकाओं के निर्माण को उल्लेखनीय रूप से तेज करता है। यह संकेत देता है कि क्षतिग्रस्त लसीका नेटवर्क की मरम्मत के लिए आईजीएफ उपयोगी हो सकता है।
मानव कोशिकाओं में पुष्टि
मानव संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता की पुष्टि के लिए शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में मानव लसीका कोशिकाओं का संवर्धन किया। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि आईजीएफ मानव लसीका वाहिकाओं की वृद्धि को भी प्रेरित कर सकता है। लसीका विकास में आईजीएफ की यह भूमिका पहले ज्ञात नहीं थी।
न्यूजीलैंड में स्तन कैंसर उपचार के दौरान लसीका ग्रंथियों को हटाने वाली लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं में लिंफेडेमा विकसित होता है। ऐसे में यह खोज बड़ी संख्या में रोगियों के लिए संभावित उपचार का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
अनुसंधान में जेब्राफिश की भूमिका
जेब्राफिश इस अध्ययन का केंद्रीय आधार रहे। इनका तीव्र विकास और मनुष्यों से आनुवंशिक समानता इन्हें अनुसंधान के लिए उपयुक्त बनाती है। वैज्ञानिक इन मछलियों में लसीका वाहिकाओं को फ्लोरोसेंट टैग से चिह्नित कर वास्तविक समय में उनकी वृद्धि का अवलोकन कर सकते हैं। इससे कोशिकीय प्रक्रियाओं को बिना विकास में बाधा पहुंचाए सटीक रूप से समझा जा सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लिंफेडेमा लसीका द्रव के अपर्याप्त निकास के कारण होने वाली सूजन है।
- इंसुलिन-सदृश वृद्धि कारक (आईजीएफ) कोशिका वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है।
- जेब्राफिश जैव-चिकित्सा अनुसंधान में व्यापक रूप से प्रयुक्त मॉडल जीव है।
- स्तन कैंसर उपचार में लसीका ग्रंथि हटाने से लिंफेडेमा का जोखिम बढ़ जाता है।
अब शोध का अगला चरण चूहों के मॉडल में आईजीएफ-आधारित उपचार का परीक्षण करना है, जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके। यद्यपि वैज्ञानिक सतर्कता बरत रहे हैं, फिर भी यह खोज एक ऐसे रोग के लक्षित उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो अब तक असाध्य माना जाता रहा है।