लद्दाख मैग्मैटिक आर्क: हिमालय के निर्माण का भूवैज्ञानिक रहस्य

लद्दाख मैग्मैटिक आर्क: हिमालय के निर्माण का भूवैज्ञानिक रहस्य

हाल ही में वैज्ञानिकों ने उत्तर-पश्चिमी हिमालय में स्थित लद्दाख मैग्मैटिक आर्क (LMA) के विकास को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस अध्ययन में लगभग 130 मिलियन वर्षों के भूवैज्ञानिक इतिहास को उजागर किया गया है, जो भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच हुए जटिल परस्पर क्रिया को दर्शाता है। यह खोज हिमालय के बनने से पहले की प्रक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण है, जब लद्दाख क्षेत्र प्राचीन नियो-टैथिस महासागर के ऊपर स्थित था।

नियो-टैथिस महासागर के नीचे गठन

हिमालय के बनने से पहले लद्दाख क्षेत्र नियो-टैथिस महासागर के ऊपर स्थित था, जहां महासागरीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही थी, जिसे सबडक्शन कहा जाता है। इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप लद्दाख मैग्मैटिक आर्क का निर्माण हुआ। यह ज्वालामुखीय चट्टानों की एक श्रृंखला है, जो जुरासिक से इओसीन काल (लगभग 201 से 34 मिलियन वर्ष पूर्व) के बीच विकसित हुई। यह क्षेत्र उस समय सक्रिय ज्वालामुखीय प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता था।

वैज्ञानिक अध्ययन और चट्टानों का विश्लेषण

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने चट्टानों के रासायनिक और समस्थानिक गुणों का विश्लेषण कर इस आर्क के विकास को समझा। उन्होंने द्रास–निदार आइलैंड आर्क कॉम्प्लेक्स, लद्दाख बैथोलिथ और युवा मैफिक डाइक्स से प्राप्त नमूनों का अध्ययन किया। इस विश्लेषण से यह पुष्टि हुई कि यह आर्क नियो-टैथिस महासागरीय प्लेट के यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसने से बना था।

मैग्मैटिक विकास के तीन चरण

अध्ययन में इस आर्क के विकास को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण (160–110 मिलियन वर्ष पूर्व) में ज्वालामुखीय द्वीप श्रृंखलाएं प्रमुख थीं और मैग्मा मुख्यतः मेंटल से उत्पन्न हुआ। दूसरे चरण (103–45 मिलियन वर्ष पूर्व) में लद्दाख बैथोलिथ के बड़े ग्रेनाइटिक संरचनाएं बनीं, जो महाद्वीपीय पदार्थ के बढ़ते योगदान को दर्शाती हैं। तीसरे चरण (45 मिलियन वर्ष के बाद) में भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर के बाद क्षेत्र में नई भूगर्भीय प्रक्रियाएं शुरू हुईं, जिससे मैग्मा और संरचना में बदलाव आया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लद्दाख मैग्मैटिक आर्क नियो-टैथिस महासागरीय प्लेट के सबडक्शन से बना है।
  • यह जुरासिक से इओसीन काल (201–34 मिलियन वर्ष पूर्व) के बीच विकसित हुआ।
  • द्रास–निदार आर्क कॉम्प्लेक्स और लद्दाख बैथोलिथ इसके प्रमुख भाग हैं।
  • यह भारत-यूरेशिया प्लेट टक्कर से जुड़ी एक प्राचीन ज्वालामुखीय प्रणाली है।

हिमालय के विकास में महत्व

लद्दाख मैग्मैटिक आर्क एक ऐसी प्राचीन ज्वालामुखीय प्रणाली है, जो अब समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके अवशेष हिमालय के निर्माण की कहानी को स्पष्ट करते हैं। यह क्षेत्र महासागरीय सबडक्शन से लेकर महाद्वीपीय टक्कर तक की प्रक्रिया को दर्शाता है। बाद के चरणों में चट्टानों में पाए गए अवसादी और महाद्वीपीय तत्व यह संकेत देते हैं कि प्लेटों का टकराव धीरे-धीरे बढ़ता गया, जिससे अंततः हिमालय पर्वतमाला का निर्माण हुआ।

यह अध्ययन न केवल हिमालय के निर्माण को समझने में मदद करता है, बल्कि पृथ्वी के भूगर्भीय विकास और प्लेट टेक्टोनिक्स की जटिल प्रक्रियाओं को भी स्पष्ट करता है।

Originally written on March 21, 2026 and last modified on March 21, 2026.

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