लक्षद्वीप की कवरत्ती लैगून से नई प्रजाति “Indiaphonte bijoyi” की खोज: भारत की समुद्री जैव विविधता में महत्वपूर्ण योगदान
भारतीय वैज्ञानिकों ने लक्षद्वीप के कवरत्ती लैगून से एक सूक्ष्म क्रस्टेशियन जीव की खोज की है, जिसे एक नया वंश (genus) और नई प्रजाति (species) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह खोज भारत के द्वीप समूहों की समृद्ध लेकिन कम अन्वेषित समुद्री जैव विविधता को उजागर करती है और समुद्री पारिस्थितिकी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कवरत्ती लैगून से खोज और वर्गीकरण
यह जीव Copepoda वर्ग के अंतर्गत Laophontidae कुल में आता है और इतना सूक्ष्म है कि इसे देखने के लिए उच्च-शक्ति वाले सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है।
शुरुआती रूप में यह पहचाने गए कोपेपॉड्स से मिलता-जुलता लगा, लेकिन विस्तृत आकारिकी (morphological) अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि इसके कुछ विशिष्ट संरचनात्मक गुण किसी भी ज्ञात वंश से मेल नहीं खाते।
नामकरण और वैज्ञानिक विवरण
नई प्रजाति को नाम दिया गया है: Indiaphonte bijoyi
- ‘Indiaphonte’ नाम भारत को सम्मानित करता है।
- ‘bijoyi’ नाम वरिष्ठ समुद्री वैज्ञानिक एस. बिजॉय नंदन के सम्मान में रखा गया है।
इसका वैज्ञानिक विवरण नीलिमा वासु के. (Cochin University of Science and Technology) और सैमुएल ई. गोमेज-नोगुएरा (UNAM University) द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय समीक्षित टैक्सोनॉमिक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
बनावट और पारिस्थितिकीय भूमिका
- इसका शरीर अर्ध-आयताकार और पिछले भाग की ओर संकरा होता है।
- इसके सामने भाग में एंटीना जैसी संरचनाएं पाई जाती हैं।
- मादा का आकार: 518 से 772 माइक्रोमीटर
- नर का आकार: 508 से 756 माइक्रोमीटर
यह प्रजाति Meiofauna समूह से संबंधित है — वे सूक्ष्म अकशेरुकी जीव जो जल तलछट में रहते हैं और पोषक चक्र और पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Indiaphonte bijoyi एक नया genus और species है जो लक्षद्वीप में खोजा गया है।
- यह Laophontidae कुल और Harpacticoida गण के अंतर्गत आता है।
- Meiofauna वे अकशेरुकी जीव हैं जो 1 मिमी से छोटे होते हैं और तलछट में रहते हैं।
- Harpacticoid copepods समुद्री पर्यावरणीय परिवर्तन के बायो-इंडिकेटर के रूप में कार्य करते हैं।
समुद्री विज्ञान और संरक्षण में महत्व
- Harpacticoid copepods ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जो ओमेगा-3 फैटी एसिड का निर्माण करते हैं, जो मछलियों की वृद्धि और मानव पोषण के लिए आवश्यक होते हैं।
- ये जीव प्रदूषण, तेल रिसाव, भारी धातुओं और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिससे ये समुद्री पारिस्थितिकीय स्वास्थ्य के विश्वसनीय संकेतक बनते हैं।
इस खोज से यह स्पष्ट होता है कि भारत के लैगून और प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र में अभी भी कई अप्रलेखित प्रजातियाँ मौजूद हैं। इसलिए टैक्सोनोमिक अनुसंधान और संरक्षण प्रयासों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।