रोमानिया की बर्फ में मिला 5,000 वर्ष पुराना एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया
वैज्ञानिकों ने रोमानिया की एक बर्फीली गुफा से लगभग 5,000 वर्ष पुराना एक बैक्टीरिया खोजा है, जो आधुनिक एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखता है। यह खोज वैश्विक तापवृद्धि और पिघलती बर्फ से उत्पन्न संभावित जैविक खतरों को लेकर नई चिंताएं पैदा करती है। हजारों वर्षों तक जमी बर्फ में अलग-थलग रहने के बावजूद इस जीवाणु में आज उपयोग की जाने वाली कई दवाओं के विरुद्ध प्रतिरोध पाया गया है।
25 मीटर गहरी बर्फ कोर से खोज
यह जीवाणु उत्तर-पश्चिमी रोमानिया स्थित Scărișoara Ice Cave की “ग्रेट हॉल” से निकाले गए 25 मीटर लंबे बर्फ कोर से प्राप्त हुआ। यह बर्फ लगभग 13,000 वर्षों के संचयन का प्रतिनिधित्व करती है। संदूषण से बचाने के लिए नमूनों को निष्फल परिस्थितियों में संभाला गया और जमे हुए रूप में प्रयोगशालाओं तक पहुंचाया गया।
विश्लेषण के दौरान कई बैक्टीरियल स्ट्रेन पृथक किए गए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण था ‘साइक्रोबैक्टर एससी65ए.3’। यह ठंड-अनुकूलित जीवाणु ऐसे वंश से संबंधित है, जिसे पूर्व में मनुष्यों और जानवरों में संक्रमण से जोड़ा गया है। प्राचीन उत्पत्ति के बावजूद इसमें आधुनिक दवाओं के प्रति उल्लेखनीय प्रतिरोध देखा गया।
दस प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध
आनुवंशिक परीक्षण में पाया गया कि इस जीवाणु में 100 से अधिक प्रतिरोध-संबंधी जीन मौजूद हैं। जब इसे मानव चिकित्सा में प्रयुक्त 10 विभिन्न वर्गों की 28 एंटीबायोटिक दवाओं के विरुद्ध परखा गया, तो यह 10 दवाओं के प्रति प्रतिरोधी सिद्ध हुआ। इनमें ट्राइमेथोप्रिम, क्लिंडामाइसिन और मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाएं शामिल हैं, जो फेफड़े, त्वचा, रक्त, प्रजनन तंत्र और मूत्र मार्ग के संक्रमणों में सामान्यतः दी जाती हैं।
यह खोज दर्शाती है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध केवल आधुनिक चिकित्सा या कृषि में दवाओं के अत्यधिक उपयोग का परिणाम नहीं है। कुछ प्रतिरोध तंत्र प्राकृतिक रूप से पर्यावरण में विकसित हुए थे, जो आधुनिक चिकित्सा के विकास से भी पहले अस्तित्व में थे।
जलवायु परिवर्तन और संभावित जैविक जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति अपने आप में किसी महामारी का संकेत नहीं देती, किंतु वे आनुवंशिक भंडार के रूप में कार्य कर सकते हैं। यदि ग्लेशियर, हिमचादर या पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से ऐसे जीवाणु मुक्त होते हैं, तो उनके प्रतिरोध जीन आधुनिक बैक्टीरिया में स्थानांतरित हो सकते हैं।
वर्ष 2016 में साइबेरिया में पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से एक संक्रमित बारहसिंगा का शव उजागर हुआ, जिससे एंथ्रेक्स का प्रकोप फैल गया था। यह घटना बढ़ते वैश्विक तापमान से जुड़े जैविक जोखिमों का उदाहरण मानी जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* ग्लेशियर, हिमचादर और हिमटोपी मिलकर पृथ्वी की लगभग 10% स्थलीय सतह को आच्छादित करते हैं।
* एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर्यावरणीय सूक्ष्मजीवों में प्राकृतिक रूप से भी विकसित हो सकता है।
* वर्ष 2016 में साइबेरिया में पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से एंथ्रेक्स का प्रकोप हुआ, जबकि इससे पहले ऐसा मामला 1941 में दर्ज हुआ था।
* साइक्रोबैक्टर प्रजातियां अत्यंत ठंडे वातावरण में पाई जाने वाली ठंड-अनुकूलित बैक्टीरिया हैं।
हालांकि इस प्राचीन जीवाणु से संभावित जोखिमों पर ध्यान देना आवश्यक है, वैज्ञानिक इसके जैव-प्रौद्योगिकी और औषधि खोज में उपयोग की संभावनाओं पर भी बल दे रहे हैं। इसके जीनोम में कई ऐसे जीन पाए गए हैं, जो बैक्टीरिया, फफूंद और विषाणुओं को अवरुद्ध करने में सक्षम हो सकते हैं। इसलिए जहां एक ओर सतर्कता आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर यह खोज भविष्य के चिकित्सा और अनुसंधान के लिए नई संभावनाओं का द्वार भी खोलती है।