रेलवे में सुरक्षा और डिजिटल नेटवर्क को बढ़ावा: ₹1,236 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर
भारतीय रेलवे ने अपने संचार तंत्र को मजबूत करने और स्वदेशी ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का विस्तार करने के लिए ₹1,236 करोड़ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित, कुशल और डिजिटल रूप से सक्षम बनाना है, जिससे विभिन्न रेलवे जोनों में समन्वय और प्रदर्शन बेहतर हो सके।
ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार
इस निवेश का बड़ा हिस्सा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार पर केंद्रित है। सेंट्रल रेलवे में ₹623.63 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, जिनके तहत मुंबई, पुणे, नागपुर, भुसावल और सोलापुर मंडलों में दोहरी (ड्यूल-पाथ) संचार प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत 2,250 रूट किलोमीटर में ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (OPGW) और 2,673 रूट किलोमीटर में भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी। यह दोहरी प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि किसी एक नेटवर्क के विफल होने पर भी संचार बाधित न हो।
राजस्व और डिजिटल क्षमता में वृद्धि
विस्तारित ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क न केवल रेलवे की सिग्नलिंग और संचार व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि अतिरिक्त आय के अवसर भी प्रदान करेगा। भारतीय रेलवे अपनी अतिरिक्त फाइबर क्षमता (डार्क फाइबर) को टेलीकॉम और डेटा कंपनियों को लीज पर देकर राजस्व बढ़ाने की योजना बना रहा है। इससे रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और डिजिटल अवसंरचना का विस्तार भी होगा।
‘कवच’ प्रणाली का विस्तार
रेलवे सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए ‘कवच’ संस्करण 4.0 को दक्षिण रेलवे के 548 किलोमीटर क्षेत्र में लागू किया जाएगा, जिस पर ₹310.18 करोड़ खर्च होंगे। इसमें जोलारपेट्टई–एरोड, चेन्नई बीच–चेंगलपट्टू और शोरानूर–मैंगलोर जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। ‘कवच’ एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो सिग्नल उल्लंघन या ट्रैक पर असुरक्षित स्थिति होने पर स्वतः ब्रेक लगाकर दुर्घटनाओं को रोकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ‘कवच’ भारत में विकसित एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है।
- ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (OPGW) बिजली के तार और डेटा ट्रांसमिशन दोनों का कार्य करता है।
- ड्यूल-पाथ कम्युनिकेशन नेटवर्क बैकअप सुविधा प्रदान करता है।
- डार्क फाइबर को लीज पर देकर रेलवे अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर सकता है।
पश्चिम रेलवे में कनेक्टिविटी परियोजनाएं
पश्चिम रेलवे को गुजरात के राजकोट और भावनगर मंडलों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पूरा करने के लिए ₹302.26 करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह परियोजना 1,653 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी और संचार नेटवर्क में मौजूद खामियों को दूर करेगी। इससे विभिन्न रेलवे जोनों के बीच बेहतर समन्वय और संचालन क्षमता सुनिश्चित होगी।
इस प्रकार, ये परियोजनाएं भारतीय रेलवे को न केवल तकनीकी रूप से उन्नत बनाएंगी, बल्कि सुरक्षा और दक्षता के नए मानक भी स्थापित करेंगी।