रेजांग ला के शौर्य को समर्पित डाक टिकट का विमोचन
भारत की सैन्य परंपरा और अदम्य वीरता को सम्मानित करते हुए नई दिल्ली में 13 कुमाऊँ रेजिमेंट की ऐतिहासिक बहादुरी को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया। यह डाक टिकट 1962 के रेजांग ला युद्ध की यादों को ताज़ा करता है, जिसमें मेजर शैतान सिंह और उनके साथियों ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया था। इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय, डाक विभाग और एक आगामी युद्ध-आधारित फिल्म के निर्माता एक साथ आए, जिससे इस वीरगाथा का गौरवपूर्ण स्मरण हुआ।
रेजांग ला युद्ध की अमर वीरता
1962 में लद्दाख के रेजांग ला में हुई लड़ाई भारतीय सेना के इतिहास की सबसे साहसिक घटनाओं में से एक मानी जाती है। -30 डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान और सीमित संसाधनों के बीच 13 कुमाऊँ बटालियन के वीर सैनिकों ने चीनी सेना से डटकर मुकाबला किया। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में यह बलिदान आज भी भारतीय सेना के लिए प्रेरणा का स्रोत है। नई डाक टिकट पर रेजांग ला युद्ध स्मारक की झलक इन सैनिकों के अदम्य आत्मबल और देशप्रेम को दर्शाती है।
फिल्म ‘120 बहादुर’ से सांस्कृतिक जुड़ाव
डाक टिकट का विमोचन उस समय हुआ जब रेजांग ला युद्ध पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ के प्रचार कार्यक्रम भी चल रहे थे। इस फिल्म में अभिनेता फरहान अख्तर मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और निर्देशक रजनीश घटक ने इसे निर्देशित किया है। फिल्म 21 नवंबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी तक उन सैनिकों की गाथा पहुँचाना है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
सरकार और डाक विभाग की भागीदारी
इस कार्यक्रम में डाक सेवाओं के महानिदेशक सहित रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन न केवल सैनिकों के साहस को याद करने का अवसर देते हैं बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की भावना को भी मजबूत करते हैं। डाक विभाग द्वारा जारी किया गया यह ‘माई स्टैम्प’ सैन्य वीरता के प्रति राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 13 कुमाऊँ बटालियन ने 1962 के रेजांग ला युद्ध में अद्वितीय पराक्रम दिखाया था।
- मेजर शैतान सिंह को इस वीरता के लिए परमवीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
- रेजांग ला युद्ध स्मारक लद्दाख के चुशुल क्षेत्र में स्थित है।
- फिल्म ‘120 बहादुर’ 21 नवंबर को रिलीज़ हो रही है और इसी ऐतिहासिक युद्ध पर आधारित है।
रेजांग ला की 63वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी यह डाक टिकट और उससे जुड़ी सांस्कृतिक पहल न केवल शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि देश अपने वीरों को कभी नहीं भूलता। यह पहल भारतीय सेना की शौर्यगाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक प्रेरक कदम है।