राष्ट्रीय शीत जल मत्स्य सम्मेलन: हिमालयी मत्स्य क्षेत्र के विकास पर जोर

राष्ट्रीय शीत जल मत्स्य सम्मेलन: हिमालयी मत्स्य क्षेत्र के विकास पर जोर

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में राष्ट्रीय शीत जल मत्स्य सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के शीत जल मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के लिए रणनीतियों पर चर्चा करना था। यह सम्मेलन केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया और इसमें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तथा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

भारत में शीत जल मत्स्य क्षेत्र का महत्व

भारत में शीत जल मत्स्य पालन एक विशिष्ट क्षेत्र है, जो मुख्य रूप से उच्च पर्वतीय और ठंडे जलवायु वाले क्षेत्रों में विकसित होता है। यह क्षेत्र हिमालयी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में प्रमुख रूप से पाया जाता है। इसके अतिरिक्त पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में भी इसका विस्तार है। लगभग 5.33 लाख वर्ग किलोमीटर पर्वतीय क्षेत्र में फैले नदियों, झीलों, जलधाराओं और जलाशयों में शीत जल मछलियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। भारत में शीत जल मछलियों की 278 से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है, जिससे यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पहल

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत भारत सरकार ने शीत जल राज्यों के लिए 2,299.56 करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है। इसके तहत हैचरी का विस्तार, बीज और चारा प्रणाली में सुधार, रेसवे सुविधाओं का विकास, कोल्ड-चेन नेटवर्क को मजबूत करना और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना शामिल है। इन पहलों के माध्यम से आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित मत्स्य पालन प्रणाली विकसित करने के साथ-साथ दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

नीति दृष्टि और क्षेत्रीय विकास

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने “शीत जल मत्स्य विकास के लिए मॉडल दिशानिर्देश” भी जारी किए। साथ ही मत्स्य योजनाओं के अंतर्गत मछुआरों, सहकारी समितियों और किसान क्रेडिट कार्ड लाभार्थियों को लाभ वितरित किए गए। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उत्कृष्ट मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों और मत्स्य स्टार्टअप्स को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में अनुसंधान और नवाचार, नई तकनीकों को अपनाने, अवसंरचना विकास तथा मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

2030 तक शीत जल मत्स्य क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय दृष्टि

भारत की राष्ट्रीय दृष्टि 2030 के तहत शीत जल मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने और उच्च मूल्य वाली मछलियों जैसे ट्राउट और महसीर के उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले दशक में ट्राउट उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन भारत अभी भी सैल्मन और ट्राउट जैसी प्रीमियम मछलियों का आयात करता है। सम्मेलन में घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और दूरदराज क्षेत्रों में मछलियों के परिवहन के लिए ड्रोन आधारित लॉजिस्टिक्स जैसे नवाचार अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में शीत जल मत्स्य पालन मुख्यतः हिमालयी और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में किया जाता है।
  • प्रमुख शीत जल मछलियों में रेनबो ट्राउट, ब्राउन ट्राउट और महसीर शामिल हैं।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना मत्स्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
  • एकीकृत एक्वा पार्क जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में स्थापित किए गए हैं।
Originally written on March 14, 2026 and last modified on March 14, 2026.

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