राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2026 में संशोधन: डिजिटल टोल प्रणाली की ओर कदम

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2026 में संशोधन: डिजिटल टोल प्रणाली की ओर कदम

भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2026 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है, जिसका उद्देश्य टोल संग्रह प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। “राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और संग्रह) (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026” के तहत एक तकनीक-आधारित ढांचा तैयार किया गया है, जो बकाया टोल शुल्क की वसूली और अनुपालन को बेहतर बनाएगा। यह कदम राजमार्ग अवसंरचना की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डिजिटल प्रवर्तन प्रणाली की शुरुआत

संशोधित नियमों के तहत टोल संग्रह में डिजिटल प्रवर्तन को बढ़ावा दिया गया है। अब बकाया टोल शुल्क की पहचान और वसूली के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली लागू की जाएगी। इससे राजस्व हानि को कम करने और टोल संग्रह की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह प्रणाली आधुनिक तकनीक के उपयोग से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।

ई-नोटिस प्रणाली की व्यवस्था

इस संशोधन की प्रमुख विशेषता ई-नोटिस प्रणाली का परिचय है। इसके अंतर्गत वाहन मालिकों को बकाया टोल शुल्क से संबंधित जानकारी—जैसे तारीख, स्थान और राशि—डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी। यह सूचना एसएमएस, ईमेल, मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध होगी। इससे वाहन मालिकों को समय पर जानकारी मिलेगी और विवादों में कमी आएगी।

FASTag और VAHAN डेटाबेस का एकीकरण

नए नियमों के तहत FASTag प्रणाली को VAHAN डेटाबेस के साथ जोड़ा जाएगा। इससे वाहनों की सटीक पहचान संभव होगी और बकाया शुल्क की वसूली अधिक प्रभावी बनेगी। यह कदम भारत में निर्बाध और बैरियर-फ्री टोल प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • FASTag भारत के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • VAHAN वाहन पंजीकरण का राष्ट्रीय डेटाबेस है, जिसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय संचालित करता है।
  • ई-नोटिस प्रणाली डिजिटल माध्यम से टोल बकाया की सूचना प्रदान करती है।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम टोल दरों और संग्रह प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।

शिकायत निवारण और प्रभाव

संशोधित नियमों में शिकायत निवारण की व्यवस्था भी शामिल की गई है, जिसके तहत वाहन मालिक 72 घंटे के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। यह सुधार टोल प्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाएगा। साथ ही, इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और देश में आधुनिक राजमार्ग अवसंरचना के विकास को गति मिलेगी।

Originally written on March 21, 2026 and last modified on March 21, 2026.

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