राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के तहत नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए 27,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य

राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के तहत नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए 27,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026 से 2030 की अवधि के लिए राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के अंतर्गत नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए 27,500 करोड़ रुपये का मौद्रीकरण लक्ष्य निर्धारित किया है। इस नए ढांचे का उद्देश्य परिचालन और राजस्व उत्पन्न करने वाले हवाई अड्डों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देना है, जबकि मूल परिसंपत्तियों का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा। यह कदम बुनियादी ढांचे के विस्तार, पूंजीगत व्यय के समर्थन और राजकोषीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लीज के लिए चिन्हित ग्यारह हवाई अड्डे

पांच वर्षीय अवधि के दौरान कुल 11 हवाई अड्डों को मौद्रीकरण के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें वाराणसी, भुवनेश्वर, अमृतसर, इंदौर, रायपुर, त्रिची, कालीकट, कोयंबटूर, रांची, जोधपुर और गया शामिल हैं।

इन प्रस्तावों पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति द्वारा विचार किया जा रहा है। इन हवाई अड्डों को निजी क्षेत्र को सीधे बेचने के बजाय संरचित रियायत समझौतों के तहत दीर्घकालिक लीज पर दिया जाएगा।

मौद्रीकरण मॉडल और ढांचा

राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के अंतर्गत हवाई अड्डों को आमतौर पर 20 से 50 वर्षों की अवधि के लिए रियायत समझौते के माध्यम से पट्टे पर दिया जाएगा। परिसंपत्तियों का स्वामित्व सरकार या संबंधित प्राधिकरण के पास रहेगा और रियायत अवधि समाप्त होने के बाद परिसंपत्तियां पुनः सार्वजनिक प्राधिकरण को सौंप दी जाएंगी।

प्रमुख मॉडल ‘ऑपरेशन, मेंटेनेंस एंड डेवलपमेंट एग्रीमेंट’ है। इसके तहत निजी रियायतधारी हवाई अड्डों का संचालन, रखरखाव और आधुनिकीकरण करेंगे तथा सरकार को अग्रिम रियायत शुल्क या राजस्व का हिस्सा देंगे। इसके अतिरिक्त विमानन क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों में चयनित रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री या आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से पूंजी जुटाने का प्रावधान भी है।

राजस्व अनुमान और वित्तीय प्रभाव

आधिकारिक आकलन के अनुसार 27,500 करोड़ रुपये के मौद्रीकरण मूल्य में अग्रिम रियायत शुल्क, भविष्य में मिलने वाले राजस्व हिस्से का वर्तमान मूल्य तथा निजी निवेश की प्रतिबद्ध राशि शामिल है। परिसंपत्तियों के अवमूल्यन को समायोजित करने के बाद कुल शुद्ध मौद्रीकरण मूल्य लगभग 22,500 करोड़ रुपये आंका गया है।

वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच अधिकांश आय हवाई अड्डा प्राधिकरणों और सार्वजनिक उपक्रमों को प्राप्त होने की संभावना है, जबकि कुछ राजस्व प्रवाह रियायत की शर्तों के अनुसार 2030 के बाद भी जारी रह सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन का उद्देश्य ब्राउनफील्ड सार्वजनिक परिसंपत्तियों से मूल्य सृजन करना है।
* हवाई अड्डों का मौद्रीकरण प्रत्यक्ष बिक्री के बजाय दीर्घकालिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी रियायत समझौतों पर आधारित होता है।
* ‘ऑपरेशन, मेंटेनेंस एंड डेवलपमेंट एग्रीमेंट’ हवाई अड्डों के लिए प्रमुख पीपीपी मॉडल है।
* सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति पीपीपी परियोजनाओं का परीक्षण और अनुमोदन करती है।

पूर्ववर्ती चरण में नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए 13,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित था, जबकि वर्तमान चरण में इसे बढ़ाकर 27,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार विमानन अवसंरचना के विस्तार और निजी निवेश आकर्षित करने के प्रति अधिक सक्रिय रुख अपना रही है। मौद्रीकरण के माध्यम से संसाधन जुटाकर देश की अवसंरचना विकास रणनीति को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

Originally written on February 25, 2026 and last modified on February 25, 2026.

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