राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस पर आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम: समय पर पहचान और सामाजिक समावेशन को मिला बल
हर वर्ष 30 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस इस बार एक व्यापक जनजागरूकता अभियान के रूप में दिल्ली हाट में आयोजित किया गया। इस अवसर का उद्देश्य न केवल कुष्ठ रोग के लक्षणों की समय पर पहचान को बढ़ावा देना था, बल्कि इसके साथ जुड़ी सामाजिक कलंक (Stigma) को कम करना और समावेशिता की भावना को सुदृढ़ करना भी था।
केंद्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों द्वारा संचालित IEC कार्यक्रम
कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय कुष्ठ प्रभाग (Central Leprosy Division) द्वारा किया गया। इस अवसर पर एक समर्पित सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) स्टॉल स्थापित किया गया, जहां आगंतुकों को कुष्ठ रोग के लक्षण, रोकथाम, उपचार और भ्रांतियों के बारे में जागरूक किया गया। बच्चों, युवाओं, वयस्कों और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्गों के लिए यह अभियान सहभागिता को प्रोत्साहित करता दिखा।
नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा नुक्कड़ नाटक, जिसमें कुष्ठ रोग के शुरुआती संकेतों और समय पर पहचान के महत्व को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद कुष्ठ रोग से प्रभावित बच्चों द्वारा एक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति हुई, जिसे रोटरी क्लब के सहयोग से आयोजित किया गया। इस प्रस्तुति ने बच्चों के आत्मविश्वास, प्रतिभा और सामाजिक समावेशन को उजागर किया और सम्मान, सशक्तिकरण व स्वीकृति के संदेश को मजबूती दी।
समय पर पहचान को बढ़ावा देने वाली सहभागितापूर्ण गतिविधियां
एक अनोखी गतिविधि ‘सेल्फ-एग्ज़ामिनेशन मिरर’ के ज़रिये आगंतुकों को खुद के शरीर पर कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण पहचानने की प्रेरणा दी गई। साथ ही, एक इंटरैक्टिव क्विज़ का आयोजन भी हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने जागरूकता से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए और पुरस्कार प्राप्त किए। इससे विषय में रुचि और भागीदारी को बढ़ावा मिला।
खबर से जुड़े जीके तथ्य:
- राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस हर साल 30 जनवरी को मनाया जाता है।
- केंद्रीय कुष्ठ प्रभाग, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय के अधीन कार्य करता है।
- कुष्ठ रोग की समय पर पहचान और उपचार से विकलांगता को रोका जा सकता है।
- कलंक-मुक्ति कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य है।
भेदभाव के विरुद्ध सामूहिक संकल्प और राष्ट्रीय लक्ष्य
कार्यक्रम में “100 सवाल और जवाब – कुष्ठ रोग पर” नामक पंपलेट सहित कई IEC ब्रोशर वितरित किए गए, जिनमें व्यवहार परिवर्तन, उपचार के पालन और शीघ्र रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, सभी प्रतिभागियों ने कुष्ठ रोग प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव नहीं करने की सामूहिक शपथ ली। यह संकल्प करुणा, समानता और समावेशन जैसे मूल्यों को पुनः स्थापित करता है।
यह जनजागरूकता कार्यक्रम #LeprosyFreeIndia के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में सामुदायिक भागीदारी, समय पर निदान, कलंक उन्मूलन और समावेशी देखभाल के प्रयासों को मजबूत करता है।