राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ अभियान का शुभारंभ किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ अभियान का शुभारंभ किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र के समग्र और संतुलित विकास के लिए भौतिक प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का समन्वय आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक प्रगति समृद्धि को बढ़ावा देती है, जबकि तकनीकी उन्नति नवाचार और दक्षता को प्रोत्साहित करती है। ये दोनों मिलकर आधुनिक राष्ट्र की आधारशिला बनाते हैं। किंतु उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विकास नैतिक मूल्यों से रहित हो जाए, तो सामाजिक असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।

अनैतिक आर्थिक विस्तार से संपत्ति का केंद्रीकरण, पर्यावरणीय क्षरण और कमजोर वर्गों का शोषण जैसी समस्याएं जन्म ले सकती हैं। इसी प्रकार, नैतिक नियंत्रण के बिना प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए विकास को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति के अनुसार आध्यात्मिकता व्यक्ति को सत्यनिष्ठा, करुणा, अहिंसा और सेवा जैसे मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। ये मूल्य कर्मयोग की अवधारणा के केंद्र में हैं, जिसमें उच्च कर्तव्यबोध के साथ निस्वार्थ कर्म करने पर बल दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित नेतृत्व अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी निर्णय ले सकता है। न्यायपूर्ण शासन से जनता का विश्वास बढ़ता है और सामाजिक स्थिरता सुदृढ़ होती है। इस प्रकार, आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी आधार बन सकती है।

राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सिखाए जाने वाले राजयोग के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल ध्यान तक सीमित नहीं है, बल्कि धर्मनिष्ठ कर्म में सक्रिय सहभागिता को भी प्रोत्साहित करता है। कर्मयोग का अर्थ है उच्च आध्यात्मिक आदर्शों का पालन करते हुए दैनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना।

उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस संस्था से जुड़े लाखों लोग अपने जीवन में कर्मयोग का अभ्यास कर समाज में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं। यह पहल मूल्य-आधारित जीवन शैली को बढ़ावा देने का माध्यम बन रही है।

  • ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ अभियान का शुभारंभ 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में हुआ।
  • ब्रह्माकुमारी एक वैश्विक आध्यात्मिक संगठन है, जो राजयोग ध्यान का प्रचार करता है।
  • गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर ने वर्ष 2026 में अपनी रजत जयंती मनाई।
  • कर्मयोग का अर्थ है निस्वार्थ भाव से कर्तव्य पालन, जो आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होता है।

राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि कर्मयोग के माध्यम से नागरिक भारत के सतत और समावेशी विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यदि आर्थिक उन्नति को नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ा जाए, तो भारत न केवल समृद्ध राष्ट्र बनेगा, बल्कि मूल्य-आधारित जीवन और न्यायपूर्ण शासन का वैश्विक उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।

Originally written on February 14, 2026 and last modified on February 14, 2026.

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