रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित नई तकनीक: शीत परमाणुओं की वास्तविक समय में बिना विघटन मापन की सफलता

रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित नई तकनीक: शीत परमाणुओं की वास्तविक समय में बिना विघटन मापन की सफलता

बेंगलुरु स्थित रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के वैज्ञानिकों ने शीत परमाणुओं (cold atoms) के स्थानीय घनत्व को बिना उनके क्वांटम अवस्था को बाधित किए वास्तविक समय में मापने की एक नई, गैर-आक्रामक (non-invasive) तकनीक विकसित की है। यह उपलब्धि क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग, और उच्च सटीकता मापन तकनीकों में क्रांतिकारी बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

शीत परमाणु मापन की चुनौतियाँ

शीत परमाणु वे परमाणु होते हैं जिन्हें लेज़र कूलिंग और ट्रैपिंग तकनीकों द्वारा लगभग शून्य कैल्विन तापमान तक ठंडा किया जाता है। इस स्थिति में वे क्वांटम गुणधर्म प्रदर्शित करते हैं और आधुनिक क्वांटम तकनीकों की नींव बनाते हैं।

परंतु इनका सटीक मापन एक चुनौती रहा है:

  • एब्जॉर्प्शन इमेजिंग घने परमाणु बादलों में कार्यक्षम नहीं होती
  • फ्लोरेसेंस इमेजिंग में अधिक समय लगता है और यह परमाणु अवस्था को बदल सकती है
    इन विधियों में मापन प्रक्रिया स्वयं ही क्वांटम तंत्र को बाधित या नष्ट कर सकती है।

रामन चालित स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS): नवीन तकनीक

इन चुनौतियों से निपटने हेतु RRI के वैज्ञानिकों ने एक तकनीक विकसित की है — Raman Driven Spin Noise Spectroscopy (RDSNS)
प्रमुख विशेषताएँ:

  • यह तकनीक स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी पर आधारित है, जो प्रोब लेज़र की ध्रुवण में परिवर्तन द्वारा परमाणुओं की प्राकृतिक स्पिन-घटकों का पता लगाती है।
  • इसमें दो अतिरिक्त रामन लेज़र बीम प्रयुक्त होती हैं जो परमाणुओं को निकटवर्ती स्पिन अवस्थाओं के बीच प्रेरित करती हैं, जिससे संकेत लगभग 10 लाख गुना बढ़ जाता है।
  • यह तकनीक 0.01 घन मिलीमीटर के सूक्ष्म आयतन में 10,000 परमाणुओं की सटीक जांच करने में सक्षम है।

प्रायोगिक पुष्टि और मुख्य निष्कर्ष

RRI की टीम ने इस तकनीक का परीक्षण पोटैशियम परमाणुओं पर किया, जो मैग्नेटो‑ऑप्टिकल ट्रैप में सीमित थे।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष:

  • RDSNS तकनीक से केंद्रीय परमाणु घनत्व मात्र 1 सेकंड में संतुलित हो गया
  • जबकि पारंपरिक फ्लोरेसेंस इमेजिंग से प्राप्त कुल परमाणु संख्या को स्थिर होने में लगभग दो गुना समय लगा
  • परिणामों को इनवर्स एबेल ट्रांसफॉर्म की सहायता से पुष्टि किया गया, जिससे यह साबित हुआ कि यह तकनीक स्थानीय मापन में अधिक प्रभावी और विश्वसनीय है

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • शीत परमाणु अत्यधिक ठंडे तापमान (~0 K) पर लेज़र तकनीक से तैयार किए जाते हैं।
  • स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी एक गैर-आक्रामक मापन तकनीक है जो परमाणुओं की आंतरिक उतार-चढ़ावों का पता लगाती है।
  • RRI विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है।
  • क्वांटम तकनीकों में गैर-आक्रामक मापन अत्यंत आवश्यक होता है।

क्वांटम तकनीकों के लिए संभावनाएँ

यह तकनीक क्वांटम कंप्यूटिंग, ग्रेविटीमीटर, मैग्नेटोमीटर और अन्य सटीक मापन यंत्रों में क्रांतिकारी उपयोग की संभावना रखती है।
RRI के QuMIX प्रयोगशाला के प्रोफेसर साप्तर्षि चौधरी के अनुसार, यह तकनीक:

  • माइक्रोन स्तर पर सटीक मापन को संभव बनाती है
  • साथ ही क्वांटम परिवहन और असंतुलन गतिकी जैसे क्षेत्रों में नई शोध संभावनाएँ खोलती है

यह शोध राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत समर्थित है और RRI को क्वांटम मापन अनुसंधान के अग्रणी संस्थानों में स्थापित करता है।

Originally written on January 9, 2026 and last modified on January 9, 2026.

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