रानी वेलु नाचियार: भारत की पहली स्वतंत्रता सेनानी रानी को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी वेलु नाचियार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भारत की सबसे साहसी और दूरदर्शी महिला शासकों में से एक बताया। अपने संदेश में उन्होंने रानी को एक ऐसी योद्धा के रूप में याद किया जिन्होंने साहस, सैन्य कौशल और स्वराज की भावना का प्रतीक बनकर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी उन्हें महिला नेतृत्व की अग्रदूत बताते हुए उनके योगदान को नमन किया।
प्रारंभिक जीवन और राजकीय प्रशिक्षण
रानी वेलु नाचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 को रामनाथपुरम (वर्तमान तमिलनाडु) में हुआ था। वे रामनाड के राजा चेल्लमुथु विजयारघुनाथ सेतुपति की इकलौती संतान थीं। पुत्र न होने के कारण उन्हें राजकुमार की तरह प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने हथियारों का संचालन, घुड़सवारी, तीरंदाजी और सिलंबम व वलारी जैसे पारंपरिक युद्धकला में महारत हासिल की। इसके साथ ही वे तमिल, अंग्रेज़ी, फ्रेंच और उर्दू भाषाओं में भी पारंगत थीं।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से संघर्ष
16 वर्ष की आयु में रानी वेलु नाचियार का विवाह मुथुवडुगनाथपेरिया उदैयाथेवर से हुआ, जो बाद में सिवगंगा रियासत के शासक बने। वर्ष 1772 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नवाब ऑफ आर्कोट की सेनाओं के साथ मिलकर सिवगंगा पर आक्रमण किया।
कलैयार कोइल युद्ध में ब्रिटिश सेना के कर्नल स्मिथ के नेतृत्व में राजा की हत्या कर दी गई। इस हिंसक आक्रमण में नागरिकों पर भी अत्याचार हुआ, जिसके बाद रानी अपनी पुत्री के साथ जंगलों में शरण लेने को मजबूर हुईं।
वनवास, सैन्य रणनीति और सहयोग
लगभग 8 वर्षों के वनवास के दौरान रानी वेलु नाचियार ने अपनी शक्ति पुनः संगठित की। उन्होंने मैसूर के हैदर अली और गोपाल नायककर जैसे शक्तिशाली नेताओं से गठबंधन किया। उन्होंने एक स्वयं की सेना, जिसमें एक महिला बटालियन भी शामिल थी, तैयार की।
उनकी दत्तक पुत्री उदैयाल ने ब्रिटिश आयुध डिपो को उड़ा कर वीरगति पाई — यह घटना उनकी प्रतिरोध की भावना का प्रतीक बन गई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रानी वेलु नाचियार ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध संगठित सशस्त्र संघर्ष करने वाली भारत की पहली शासिका थीं।
- उन्होंने 18वीं सदी में सिवगंगा रियासत पर शासन किया, जो आज के तमिलनाडु में स्थित है।
- उन्होंने भारत की पहली महिला सैन्य इकाइयों में से एक की स्थापना की।
- उन्होंने 1780 में सिवगंगा को पुनः प्राप्त किया, जो 1857 की क्रांति से कई दशक पहले की घटना है।
विजय, शासन और विरासत
1780 में, रानी वेलु नाचियार ने ब्रिटिश सेनाओं को पराजित कर सिवगंगा पर पुनः अधिकार स्थापित किया, जिससे वे ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला शासक बनीं। इसके बाद उन्होंने शासन में ध्यान केंद्रित किया और बाद में सत्ता अपनी पुत्री को सौंप दी, लेकिन एक मार्गदर्शक के रूप में सक्रिय रहीं।
रानी का 1796 में निधन हुआ। उनकी वीरता, संघर्ष और दूरदृष्टि आज भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट स्थान रखती है। वे आज भी महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रतीक हैं।