राज्यों में राज्यपाल और उपराज्यपालों का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

राज्यों में राज्यपाल और उपराज्यपालों का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल तथा उपराज्यपाल पदों पर बड़े पैमाने पर फेरबदल की घोषणा की है। इस निर्णय में कुछ अधिकारियों का स्थानांतरण, कुछ की नई नियुक्ति और एक इस्तीफे को स्वीकार किया जाना शामिल है। यह प्रशासनिक बदलाव देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। ऐसे फेरबदल समय-समय पर होते रहते हैं ताकि प्रशासनिक संतुलन बना रहे और संवैधानिक संस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

प्रमुख राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति

इस फेरबदल के तहत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं तेलंगाना के मौजूदा राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है।

इसके अलावा बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। इन नियुक्तियों से विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बदलाव

तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को अब पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। साथ ही राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

अंतरिम व्यवस्था के तहत केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जब तक तमिलनाडु के लिए नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक वे यह जिम्मेदारी निभाएंगे।

केंद्र शासित प्रदेशों में नए उपराज्यपाल

केंद्र शासित प्रदेशों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। लद्दाख के उपराज्यपाल काविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

दिल्ली के उपराज्यपाल रहे विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। वहीं भारत के पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार किसी राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • राज्यपाल अपने पद पर राष्ट्रपति की इच्छा तक बने रहते हैं, जिसे “प्लेजर ऑफ द प्रेसिडेंट” कहा जाता है।
  • राज्यपाल किसी राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और वे राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
  • दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश, जहां विधानसभा होती है, वहां प्रशासन की देखरेख उपराज्यपाल द्वारा की जाती है।

भारत में राज्यपाल और उपराज्यपाल संवैधानिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। वे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं तथा संविधान के प्रावधानों की रक्षा करते हैं। ऐसे प्रशासनिक फेरबदल शासन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और विभिन्न राज्यों में संतुलित नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर किए जाते हैं।

Originally written on March 7, 2026 and last modified on March 7, 2026.

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