राजस्थान का पहला पूर्ण जैविक ग्राम पंचायत बना बमनवास कांकर: सामुदायिक कृषि में नई मिसाल
राजस्थान के नवगठित कोटपूतली-बेहरोड़ ज़िले में स्थित बमनवास कांकर ग्राम पंचायत राज्य की पहली ऐसी पंचायत बन गई है जिसे पूरी तरह जैविक (fully organic) होने का प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ है। सात राजस्व गांवों से मिलकर बनी यह पंचायत रासायनिक मुक्त खेती और पारिस्थितिक पशुपालन को अपनाकर टिकाऊ कृषि की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।
सतत कृषि की ओर सामूहिक बदलाव
गांव के किसानों ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों के निरंतर उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, जल स्तर में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि और स्वास्थ्य समस्याओं जैसी चुनौतियों को महसूस किया। इसके बाद ग्राम स्तर पर सामूहिक चर्चा हुई और किसानों ने अल्पकालिक उत्पादकता से दीर्घकालिक स्थिरता की ओर कदम बढ़ाया। सरपंच गणेश जाट के अनुसार, अब गांव की कृषि, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण एकीकृत रूप से चलाए जा रहे हैं।
जैविक विधियाँ और पारिस्थितिक दृष्टिकोण
बमनवास कांकर में अब सभी कृषि कार्य बिना रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के किए जाते हैं। किसान फसल चक्र, मल्चिंग, और जैविक कीट नियंत्रण जैसे उपाय अपनाते हैं। खाद के रूप में वर्मी कंपोस्ट और जैविक मिट्टी सुधारक प्रयुक्त होते हैं। पशुपालन भी अब स्वास्थ्य-संवेदी और पर्यावरणीय मापदंडों पर आधारित है, जिससे दुग्ध उत्पाद अधिक सुरक्षित हुए हैं और पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है।
संस्थागत सहयोग और प्रमाणन प्रक्रिया
इस परिवर्तन को कोफार्मिन फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक सोसाइटीज एंड प्रोड्यूसर कंपनियों (COFED) का तकनीकी और संस्थागत सहयोग मिला। फेडरेशन ने किसानों को प्रशिक्षण, बाज़ार संपर्क और प्रमाणन प्रक्रिया में सहायता प्रदान की। सातों गांवों के खेत और पशुओं का डेटा एकत्रित कर लिया गया है, और प्रथम प्रमाणन चक्र वर्तमान में चल रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैविक खेती में रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता।
- फसल चक्र और मल्चिंग मिट्टी की उर्वरता और नमी बनाए रखने में सहायक होते हैं।
- जैविक प्रमाणन बाजार में बेहतर पहुंच और मूल्य प्राप्ति में मदद करता है।
- सामुदायिक भागीदारी सतत ग्रामीण विकास की कुंजी मानी जाती है।
किसानों को लाभ और राज्यव्यापी मॉडल
गांव के किसानों ने मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता में वृद्धि और रासायनिक निर्भरता में कमी जैसे प्रत्यक्ष लाभ अनुभव किए हैं। 2 जनवरी को पंचायत ने सार्वजनिक रूप से रासायनिक खेती के त्याग की शपथ ली। कोफेड के संस्थापक जितेन्द्र सेवावत ने बताया कि यह प्रयास दर्शाता है कि जब समुदाय स्वयं जिम्मेदारी लेते हैं, तब सतत कृषि संभव होती है। उनका लक्ष्य है कि वर्ष के अंत तक राजस्थान की 300 पंचायतों को पूर्ण जैविक ग्राम पंचायतों में परिवर्तित किया जाए।
बमनवास कांकर का यह मॉडल दिखाता है कि यदि ग्राम स्तर पर निर्णय लिए जाएं और उचित मार्गदर्शन मिले, तो पर्यावरणीय संरक्षण और आर्थिक समृद्धि साथ-साथ संभव हैं।