राजकीय इटखोरी महोत्सव से झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा
झारखंड के चतरा जिले में तीन दिवसीय राजकीय इटखोरी महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को भव्य समारोह के साथ हुआ। इस वार्षिक सांस्कृतिक आयोजन में राज्य के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। महोत्सव का उद्घाटन राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद और चतरा के सांसद कालीचरण सिंह की उपस्थिति में किया। यह उत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन विरासत को समर्पित है, जिसमें इटखोरी स्थित ऐतिहासिक भद्रकाली मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है।
उद्घाटन समारोह और प्रमुख घोषणाएँ
उद्घाटन अवसर पर मंत्रियों ने संयुक्त रूप से भद्रकाली मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और डिजिटल माध्यम से श्रद्धालुओं तक सूचना की पहुँच को आसान बनाना है। साथ ही मंदिर के इतिहास, स्थापत्य शैली और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाने वाली एक कॉफी टेबल बुक भी जारी की गई।
सभा को संबोधित करते हुए अतिथियों ने स्थानीय परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक उत्सव न केवल सामाजिक एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्यटन अवसंरचना को मजबूत कर इटखोरी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार प्रयासरत है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी पहली शाम
महोत्सव के पहले दिन पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। स्थानीय कलाकारों ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी और लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा। आने वाले दिनों में आध्यात्मिक प्रवचन, सांस्कृतिक प्रदर्शनी और पर्यटन से संबंधित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।
इसके अतिरिक्त, हस्तशिल्प स्टॉल और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जिससे क्षेत्रीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक लाभ मिल सके। इस प्रकार महोत्सव सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करने का माध्यम बन रहा है।
इटखोरी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
इटखोरी झारखंड के धार्मिक मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान रखता है। यहाँ स्थित भद्रकाली मंदिर हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं के समन्वित प्रभाव का प्रतीक माना जाता है। क्षेत्र में मिले पुरातात्विक अवशेष प्राचीन बस्तियों और धार्मिक गतिविधियों के साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।
राज्य सरकार इटखोरी को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अवसंरचनात्मक सुधार और विरासत संरक्षण के प्रयास कर रही है। बेहतर सड़क संपर्क, डिजिटल सुविधाएँ और पर्यटक सेवाएँ इस दिशा में उठाए गए कदम हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* इटखोरी झारखंड के चतरा जिले में स्थित है।
* भद्रकाली मंदिर में हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं के समन्वित प्रभाव देखने को मिलते हैं।
* झारखंड का गठन वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर भारत के 28वें राज्य के रूप में हुआ था।
* राज्य प्रायोजित सांस्कृतिक महोत्सव क्षेत्रीय पर्यटन और विरासत संरक्षण को बढ़ावा देते हैं।
राजकीय इटखोरी महोत्सव से न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ हो रही है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल रही है। डिजिटल पहल और निरंतर प्रचार-प्रसार के साथ इटखोरी पूर्वी भारत के एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है।