रक्षा मंत्रालय ने ₹4,666 करोड़ के सौदे किए: सेना के लिए CQB कार्बाइन और नौसेना के लिए हैवीवेट टॉरपीडो की खरीद
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने ₹4,666 करोड़ के रक्षा खरीद अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे देश की सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति और संचालनिक तत्परता को मजबूती मिली है। इस पहल में भारतीय सेना और नौसेना के लिए क्लोज़ क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए हैवीवेट टॉरपीडो की खरीद शामिल है।
सेना और नौसेना के लिए CQB कार्बाइन
- पहले अनुबंध के तहत 4.25 लाख से अधिक CQB कार्बाइन भारतीय सेना और नौसेना में शामिल की जाएँगी।
- अनुबंध मूल्य ₹2,770 करोड़ है और आपूर्ति भारत फोर्ज लिमिटेड और PLR सिस्टम्स प्रा. लि. द्वारा की जाएगी।
- ये स्वदेशी रूप से विकसित हथियार पुराने छोटे हथियारों की जगह लेंगे और शहरी व आतंकवाद विरोधी अभियानों में उपयोग के लिए उपयुक्त हैं।
विशेषताएँ:
- कॉम्पैक्ट आकार,
- तेज़ फायरिंग गति,
- उन्नत सटीकता,
- और संकीर्ण स्थानों में प्रभावी संचालन।
आत्मनिर्भरता और रक्षा विनिर्माण
- यह सौदा आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- इससे MSME क्षेत्र, स्थानीय रोजगार, और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बल मिलेगा।
- सरकार–उद्योग सहयोग के नए मॉडल को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
कलवरी पनडुब्बियों के लिए हैवीवेट टॉरपीडो
- दूसरा अनुबंध ₹1,896 करोड़ का है, जो WASS Submarine Systems S.R.L. के साथ किया गया है।
- इसके तहत 48 हैवीवेट टॉरपीडो की आपूर्ति की जाएगी, जिन्हें कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों में एकीकृत किया जाएगा।
- आपूर्ति अप्रैल 2028 से प्रारंभ होकर 2030 की शुरुआत तक पूरी होगी।
टॉरपीडो की क्षमताएँ:
- उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली,
- प्रोपल्शन तकनीक,
- पानी के भीतर युद्धक्षमता को कई गुना बढ़ाएंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CQB कार्बाइन शहरी और क्लोज़-कॉम्बैट स्थितियों के लिए डिज़ाइन की गई होती हैं।
- कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियाँ Project-75 के अंतर्गत हैं, जो Scorpène डिज़ाइन पर आधारित हैं।
- आत्मनिर्भर भारत पहल का उद्देश्य स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
- हैवीवेट टॉरपीडो पनडुब्बियों और युद्धपोतों के लिए मुख्य हथियार प्रणाली हैं।
रक्षा पूंजी खरीद में तेज़ी
इन अनुबंधों के साथ वित्त वर्ष 2025–26 में अब तक रक्षा मंत्रालय द्वारा की गई कुल पूंजीगत खरीद ₹1,82,492 करोड़ तक पहुँच चुकी है।
- यह आंकड़ा रक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों की समावेशिता और आयात-निर्भरता में कमी को दर्शाता है।
- साथ ही, यह भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र संचालनिक तैयारियों को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ये सौदे भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता और आधुनिक सशस्त्र बलों के निर्माण की दिशा में निर्णायक माने जा रहे हैं।
Originally written on
January 3, 2026
and last modified on
January 3, 2026.