यूरोपीय संघ ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित किया
यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को औपचारिक रूप से आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह निर्णय तेहरान की नीतियों के खिलाफ यूरोपीय रुख में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है और Islamic State तथा अल-कायदा जैसे संगठनों की श्रेणी में IRGC को लाकर सुरक्षा, मानवाधिकार और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर यूरोपीय चिंताओं को दर्शाता है।
निर्णय का कारण और पृष्ठभूमि
यह कदम देशव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हुए हिंसक दमन की खबरों के बाद उठाया गया, जिनमें हजारों लोगों की कथित मौत, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और व्यवस्थित दमन की जानकारी सामने आई।
IRGC की स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान की धार्मिक प्रणाली की सुरक्षा के लिए की गई थी, लेकिन अब यह संस्था सैन्य, खुफिया और आर्थिक क्षेत्रों में गहरा प्रभाव रखती है।
EU के अनुसार, IRGC की आंतरिक दमनकारी भूमिका और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क के माध्यम से बाहरी गतिविधियाँ इस सूची में डालने के लिए पर्याप्त कारण हैं।
यूरोप और इज़राइल की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ यूरोपीय अधिकारियों ने कहा कि नागरिकों पर हो रही हिंसा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। शुरू में संकोच कर रहे फ्रांस और इटली जैसे देशों ने भी इस कदम का समर्थन किया, और इसे सुरक्षा और कानूनी दृष्टिकोण से आवश्यक बताया।
इज़राइल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि इससे यूरोप को IRGC से जुड़े वित्तीय, लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल नेटवर्क को बाधित करने की क्षमता मिलेगी।
कानूनी और सुरक्षा प्रभाव
EU की इस आतंकी घोषणा से कानूनी दायरे में बड़ा परिवर्तन आता है।
अब यूरोपीय अधिकारियों को किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सीधे IRGC से संबंध ही पर्याप्त होगा, उन्हें किसी विशिष्ट आतंकी हमले में संलिप्तता सिद्ध नहीं करनी होगी।
- इससे आसानी से संपत्ति जब्ती,
- त्वरित अभियोजन,
- और यूरोपीय सुरक्षा एजेंसियों जैसे यूरोपोल के सहयोग में मजबूती आएगी।
यह कदम IRGC के लिए यूरोप में फंडिंग और संचालन को कठिन बना देगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IRGC की स्थापना 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी।
- यह ईरान के मिसाइल और रणनीतिक हथियार कार्यक्रमों में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
- EU की आतंकी सूची में शामिल होने से संपत्ति जब्ती और अभियोजन की प्रक्रिया सरल हो जाती है।
- Europol जैसे एजेंसियों के साथ सीमा पार सुरक्षा सहयोग मजबूत होता है।
ईरान की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक स्थिति
ईरान ने EU के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे रणनीतिक भूल बताया और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की चेतावनी दी। तेहरान ने प्रत्युत्तर में कदम उठाने की बात कही और यूरोप पर सुरक्षा ढांचे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
हालांकि EU ने यह स्पष्ट किया कि राजनयिक वार्तालाप के द्वार खुले रहेंगे। इसके साथ ही, EU ने मानवाधिकार उल्लंघनों, सेंसरशिप और ईरान के ड्रोन तथा मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए हैं।
यह निर्णय वैश्विक कूटनीति में एक निर्णायक मोड़ है, जो पश्चिम एशिया में नए संतुलन और सुरक्षा रणनीतियों को आकार दे सकता है।