यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की दिशा में छत्तीसगढ़ का सिरपुर
छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक नगर सिरपुर एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की तैयारी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) की संयुक्त निरीक्षण टीम ने हाल ही में स्थल का मूल्यांकन किया, जिससे संरक्षण और पर्यटन-सुविधाओं से जुड़ी तैयारियाँ और गति पकड़ चुकी हैं।
सिरपुर का ऐतिहासिक महत्व
सिरपुर का इतिहास 5वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का है। यह एक बहु-धार्मिक पुरातात्विक स्थल है, जहाँ हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े स्मारक एक साथ विद्यमान हैं। खुदाई में यहाँ मंदिर, विहार, महल के अवशेष, बाजार परिसर और उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली के प्रमाण मिले हैं। लक्ष्मण मंदिर, सुरंग टीला परिसर और कई उत्खनित मठ इस स्थल की स्थापत्य कला और आध्यात्मिक गहराई को दर्शाते हैं।
यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के लाभ
विश्व धरोहर सूची में शामिल होना किसी स्थान के असाधारण सार्वभौमिक मूल्य की मान्यता है। इस दर्जे से अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ती है, पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और संरक्षण हेतु वैश्विक वित्तीय सहयोग के अवसर पैदा होते हैं। महा नदी के किनारे स्थित सिरपुर का नदी तटीय सांस्कृतिक परिदृश्य यूनेस्को के “संयुक्त सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर” मानदंडों से मेल खाता है।
अवसंरचना और संरक्षण योजनाएँ
सिरपुर के विस्तृत स्मारक क्षेत्र को एकीकृत करने के लिए प्रशासन “हेरिटेज कॉरिडोर” विकसित कर रहा है। इसके तहत विभिन्न स्मारकों को जोड़ने के लिए एकीकृत पथ बनाए जाएंगे और बैटरी चालित परिवहन की सुविधा दी जाएगी। यह स्थल स्वाभाविक रूप से चार प्रमुख समूहों में विभाजित है बौद्ध मठ परिसर, हिंदू मंदिर समूह, नागरिक–प्रशासनिक क्षेत्र, और नदी तटीय पवित्र परिदृश्य। भूमि हस्तांतरण और पुरातात्विक टीले के सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी तेज़ी से चल रही है, जिससे भविष्य के उत्खनन और प्रबंधन कार्यों को मजबूती मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सिरपुर में हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े कुल 34 स्मारक स्थित हैं।
- लक्ष्मण मंदिर 7वीं शताब्दी का भारत के श्रेष्ठ ईंट-निर्मित मंदिरों में से एक है।
- एएसआई और साडा मिलकर सिरपुर की यूनेस्को नामांकन प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं।
- चार थीमेटिक समूहों को हेरिटेज पथों के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
पर्यटन और व्याख्या संबंधी पहल
यहाँ एक आधुनिक व्याख्या केंद्र (Interpretation Centre) स्थापित किया जा रहा है, जिसमें डिजिटल प्रदर्शनियाँ, 3D पुनर्निर्माण और रोचक कथानक-आधारित प्रस्तुति शामिल होगी। आगंतुकों के लिए जल स्रोत, छायादार विश्राम स्थल, बहुभाषी संकेतक, क्यूआर-आधारित सूचना पट्ट और थीम-आधारित ट्रेल संकेतक जैसी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। पर्यावरण-अनुकूल लैंडस्केपिंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, हेरिटेज वॉक और विश्व धरोहर सप्ताह के वार्षिक आयोजन सिरपुर को एक सतत और आकर्षक विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे।