युविका कार्यक्रम से छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ती रुचि

युविका कार्यक्रम से छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ती रुचि

भारत सरकार युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी दिशा में ‘युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम’ (युविका) एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम स्कूली छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

युविका का उद्देश्य और लक्षित वर्ग

युविका कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में प्रारंभिक स्तर पर ही अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तैयार किया गया है। इसके माध्यम से छात्रों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इसके अनुप्रयोग और शोध के बारे में बुनियादी जानकारी दी जाती है। साथ ही, उन्हें इस क्षेत्र में भविष्य के अवसरों से भी परिचित कराया जाता है।

चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता

इस कार्यक्रम में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित है। छात्रों का चयन उनके शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है। इसके बाद एक ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जिसमें सफल छात्रों को अंतिम रूप से चुना जाता है। चयन के बाद सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

भागीदारी और उपलब्धियां

युविका कार्यक्रम को देशभर में छात्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब तक कुल 1,320 छात्र इस कार्यक्रम का लाभ उठा चुके हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत में युवा पीढ़ी अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति तेजी से आकर्षित हो रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • युविका (YUVIKA) का पूरा नाम युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जिसे इसरो द्वारा संचालित किया जाता है।
  • यह कार्यक्रम कक्षा 9 के छात्रों को लक्षित करता है।
  • इसमें ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों के लिए 15% आरक्षण का प्रावधान है।
  • इसका उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति प्रारंभिक रुचि विकसित करना है।

यह पहल न केवल छात्रों को नई दिशा प्रदान कर रही है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। समावेशिता और प्रतिभा विकास पर जोर देकर यह कार्यक्रम भविष्य में एक सक्षम वैज्ञानिक कार्यबल तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा।

Originally written on April 2, 2026 and last modified on April 2, 2026.

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