यश अनिल रशिया: रोल बॉल वर्ल्ड कप 2025 के स्वर्ण पदक विजेता, सूरत से वैश्विक मंच तक की उड़ान
सूरत के 20 वर्षीय यश अनिल रशिया ने रोल बॉल के क्षेत्र में भारत को गौरवान्वित करते हुए 7वें रोल बॉल वर्ल्ड कप 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। दुबई में आयोजित इस विश्व कप में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत में यश की निर्णायक भूमिका रही, जिससे न केवल भारत को गौरव प्राप्त हुआ बल्कि सूरत के उभरते खेल पारिस्थितिकी तंत्र को भी वैश्विक मान्यता मिली।
विश्व कप जीत में निर्णायक योगदान
भारत की ओर से चुने गए 12 शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल यश रशिया ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। लीग चरण में उन्होंने सऊदी अरब और ब्राजील के खिलाफ दो-दो गोल किए। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दो निर्णायक गोल, सेमीफाइनल में मिस्र के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण गोल, और फाइनल में केन्या के खिलाफ विजयी गोल किया।
इन योगदानों के दम पर भारत ने रोल बॉल वर्ल्ड कप 2025 का खिताब अपने नाम किया।
स्केटिंग से अंतरराष्ट्रीय रोल बॉल तक का सफर
सूरत में जन्मे और पले-बढ़े यश ने 2009 में अपने खेल जीवन की शुरुआत स्केटिंग से की। वर्ष 2017 में कोच जयमिन भरत पटेल के मार्गदर्शन में उन्होंने रोल बॉल में कदम रखा — यह एक तेज़ रफ्तार खेल है जो स्केटिंग, हैंडबॉल और बास्केटबॉल के तत्वों को जोड़ता है।
केवल छह महीनों के प्रशिक्षण के बाद ही उन्होंने गोवा के पणजी में आयोजित सब-जूनियर राष्ट्रीय रोल बॉल चैंपियनशिप में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया, जिससे उनके खेल कौशल की तीव्र प्रगति का संकेत मिला।
राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन
यश रशिया ने गुजरात की ओर से 19वीं से 22वीं सीनियर राष्ट्रीय रोल बॉल चैंपियनशिप में भाग लिया है और अब तक 18 राज्यों और 17 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:
- ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी रोल बॉल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- 22वीं सीनियर राष्ट्रीय रोल बॉल चैंपियनशिप (2025, इंदौर) में रजत पदक
- 5वीं रोल बॉल फेडरेशन कप (2025, झारखंड) में रजत पदक
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रोल बॉल एक ऐसा खेल है जो स्केटिंग, हैंडबॉल और बास्केटबॉल के कौशलों को एकत्र करता है।
- 7वां रोल बॉल वर्ल्ड कप 2025 दुबई में आयोजित किया गया था।
- भारत ने इस विश्व कप में नॉकआउट मैचों में निर्णायक जीत के साथ खिताब जीता।
- सूरत भारत में गैर-पारंपरिक खेलों का एक उभरता हुआ केंद्र बन रहा है।
पारिवारिक सहयोग और बढ़ती पहचान
यश अपनी सफलता का श्रेय अनुशासित प्रशिक्षण और परिवार के मजबूत समर्थन को देते हैं। उनके पिता अनिल विठ्ठल रशिया ने खेल संबंधी वित्तीय ज़रूरतों को पूरा किया, जबकि माँ रेशमा अनिल रशिया ने अनुशासित जीवनशैली सुनिश्चित की। उनकी बहन मिताली अनिल रशिया उनके लिए शुरुआती प्रेरणा रहीं।
विश्व कप जीत के बाद यश और अन्य सूरत के एथलीटों का शहर में भव्य स्वागत किया गया, जिससे यह स्पष्ट है कि रोल बॉल और अन्य उभरते खेलों में सूरत की भागीदारी और प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।
यश रशिया की यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत के खेल परिदृश्य में नए अवसरों की दस्तक भी है।