यशवंत गुप्ता को एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित

यशवंत गुप्ता को एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित

प्रसिद्ध भारतीय खगोल भौतिक विज्ञानी यशवंत गुप्ता को कोलकाता स्थित एमपी बिड़ला प्लैनेटेरियम में प्रतिष्ठित एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया। यशवंत गुप्ता पुणे में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के अंतर्गत नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स के निदेशक हैं। उन्हें यह सम्मान रेडियो खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया। पुरस्कार समारोह के दौरान उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में प्लैनेटेरियम की बचपन की एक यात्रा ने ब्रह्मांड के प्रति उनकी जिज्ञासा को जगाया और वैज्ञानिक अनुसंधान में करियर बनाने की प्रेरणा दी।

रेडियो खगोल विज्ञान में योगदान

एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। यशवंत गुप्ता ने भारत में रेडियो खगोल विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स में उनका शोध पल्सर, ब्रह्मांडीय घटनाओं और दूरस्थ खगोलीय स्रोतों से आने वाले रेडियो संकेतों के अध्ययन पर केंद्रित है। उन्नत रेडियो दूरबीनों के विकास और अनुसंधान के माध्यम से उन्होंने ब्रह्मांड की समझ को विस्तार देने में योगदान दिया है और वैश्विक खगोल भौतिकी अनुसंधान में भारत की भूमिका को मजबूत किया है।

प्लैनेटेरियम से मिली प्रेरणा

पुरस्कार स्वीकार करते समय गुप्ता ने अपने छात्र जीवन की एक घटना साझा की। उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में एमपी बिड़ला प्लैनेटेरियम की यात्रा ने उनके मन में ब्रह्मांड के रहस्यों के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न की थी। उसी अनुभव ने उन्हें खगोल भौतिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कई दशकों बाद उसी संस्थान में पुरस्कार प्राप्त करना उनके लिए एक भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह प्लैनेटेरियम आने वाली पीढ़ियों के छात्रों को विज्ञान और खगोल विज्ञान के प्रति प्रेरित करता रहेगा।

पुरस्कार का इतिहास और महत्व

एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड की स्थापना वर्ष 1993 में की गई थी। इसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना है। यह पुरस्कार एमपी बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और एमपी बिड़ला प्लैनेटेरियम द्वारा प्रदान किया जाता है। सामान्यतः यह पुरस्कार हर दो वर्ष में दिया जाता है, हालांकि प्लैनेटेरियम के नवीनीकरण कार्य और कोविड-19 महामारी के कारण कुछ समय तक इसमें अंतराल आया था। गुप्ता को सम्मानित करने वाला समारोह पहले आयोजित होना था, लेकिन बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने के कारण इसे स्थगित करना पड़ा।

पुरस्कार विजेताओं की गौरवशाली परंपरा

एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड से पहले भी कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जा चुका है, जिन्होंने भारत के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें खगोल भौतिक विज्ञानी जयंत विष्णु नार्लीकर, रेडियो खगोल वैज्ञानिक गोविंद स्वरूप, अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसे नाम शामिल हैं। वर्ष 2019 में यह सम्मान प्रोफेसर थानु पद्मनाभन को प्रदान किया गया था। यशवंत गुप्ता को यह पुरस्कार दिया जाना भारत में वैज्ञानिक उत्कृष्टता की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कोलकाता का एमपी बिड़ला प्लैनेटेरियम एशिया के सबसे बड़े प्लैनेटेरियमों में से एक है।
  • एमपी बिड़ला मेमोरियल अवार्ड की स्थापना 1993 में की गई थी।
  • इसके पूर्व विजेताओं में एपीजे अब्दुल कलाम, जयंत विष्णु नार्लीकर और के. कस्तूरीरंगन शामिल हैं।
  • नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स महाराष्ट्र में स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप का संचालन करता है।
Originally written on March 14, 2026 and last modified on March 14, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *