यमन में प्रधानमंत्री पद पर नेतृत्व परिवर्तन: शाया मोहसिन जिंदानी बने नए प्रधानमंत्री

यमन में प्रधानमंत्री पद पर नेतृत्व परिवर्तन: शाया मोहसिन जिंदानी बने नए प्रधानमंत्री

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ है, जहाँ प्रधानमंत्री सालेम बिन ब्रेक ने इस्तीफा दे दिया है। सऊदी अरब समर्थित राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (Presidential Leadership Council – PLC) ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए विदेश मंत्री शाया मोहसिन जिंदानी को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। इस संवेदनशील समय पर यह बदलाव युद्ध-पीड़ित यमन के लिए राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की एक अहम चुनौती बन गया है।

राष्ट्रपति परिषद द्वारा नेतृत्व परिवर्तन को स्वीकृति

प्रधानमंत्री बिन ब्रेक ने गुरुवार को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे PLC ने त्वरित रूप से स्वीकार कर लिया। इसके बाद यमन की सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से जिंदानी की नियुक्ति की औपचारिक घोषणा की गई। परिषद ने उन्हें नए मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया है, जो कि अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्य प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप होगी।

सऊदी–UAE तनाव के बीच आया यह परिवर्तन

यह नेतृत्व परिवर्तन उस समय हुआ है जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच यमन में प्रभाव और सुरक्षा को लेकर तनाव चरम पर है। दिसंबर 2025 में UAE समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने दक्षिण और पूर्वी यमन के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण बढ़ा लिया, जिससे वह सऊदी सीमा के काफी करीब पहुंच गया। रियाद ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती माना और सऊदी समर्थित बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण पाया।

गठबंधन राजनीति और आंतरिक दबाव

सऊदी अरब और UAE ने ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन में लंबे समय तक सहयोग किया है। परंतु क्षेत्रीय भू-राजनीति और तेल उत्पादन नीति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, जिससे यमन की राजनीतिक स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। इन मतभेदों ने एंटी-हूथी कैंप के भीतर एकता को कमजोर किया है और सत्ता के केंद्रों में ओवरलैपिंग और प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यमन में शासन की बागडोर 2022 में गठित राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) के पास है।
  • साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) दक्षिण यमन की स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करती है।
  • हूथी आंदोलन को ईरान का समर्थन प्राप्त है और वह उत्तरी यमन के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण रखता है।
  • यमन संघर्ष को विश्व के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में गिना जाता है।

नए प्रधानमंत्री के समक्ष चुनौतियाँ

नव नियुक्त प्रधानमंत्री शाया मोहसिन जिंदानी के सामने मंत्रिमंडल गठन की तात्कालिक चुनौती है, जिसमें उन्हें विभिन्न गुटों और सहयोगी दलों के बीच संतुलन बैठाना होगा। यमन अब भी आर्थिक पतन, खाद्य असुरक्षा और नाजुक युद्धविराम व्यवस्था से जूझ रहा है। यह नेतृत्व परिवर्तन देश के राजनीतिक तंत्र की अस्थिरता को दर्शाता है, जहाँ गृहयुद्ध और आंतरिक मतभेदों के बीच स्थायी शासन व्यवस्था स्थापित करना एक लंबी प्रक्रिया बनी हुई है।

यह घटनाक्रम यमन के भविष्य के लिए निर्णायक हो सकता है, जहाँ आंतरिक शासन व्यवस्था, क्षेत्रीय गठबंधन और मानवीय स्थिति सभी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

Originally written on January 16, 2026 and last modified on January 16, 2026.

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