म्यांमार के खिलाफ रोहिंग्या नरसंहार मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सुनवाई शुरू
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने म्यांमार द्वारा अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित नरसंहार के मामले में तीन सप्ताह की सुनवाई की शुरुआत की है। यह मामला हाल के वर्षों के सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों में से एक माना जा रहा है और इसे वैश्विक स्तर पर गहन नजरों से देखा जा रहा है। सुनवाई हेग स्थित पीस पैलेस में हो रही है।
रोहिंग्या संकट की पृष्ठभूमि
यह मामला 2017 में म्यांमार की सेना द्वारा चलाए गए अभियान पर केंद्रित है, जिसके चलते लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को अपने घर छोड़कर बांग्लादेश भागना पड़ा। बचे हुए लोगों ने आगजनी, सामूहिक बलात्कार और हत्याओं की रिपोर्ट दी है, जिनका आरोप म्यांमार की सेना और उससे संबद्ध मिलिशिया पर है। आज भी करीब 11.7 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित भीड़भाड़ वाले शिविरों में रह रहे हैं, जहां वे मानवीय संकट और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।
गाम्बिया की कानूनी पहल
इस मामले में 2019 में गाम्बिया ने म्यांमार के खिलाफ 1948 के नरसंहार सम्मेलन के तहत ICJ में याचिका दायर की थी। इस सम्मेलन के तहत कोई भी सदस्य देश ऐसे किसी भी देश के खिलाफ मामला दर्ज कर सकता है जिस पर नरसंहार का संदेह हो — भले ही वह प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न हो। गाम्बिया का आरोप है कि म्यांमार की कार्यवाही रोहिंग्या समुदाय को पूरी या आंशिक रूप से नष्ट करने के उद्देश्य से की गई थी।
ICJ की सुनवाई और अंतरिम निर्देश
ICJ पहले ही म्यांमार की इस मामले में क्षेत्राधिकार पर आपत्ति को खारिज कर चुका है, जिससे अब मामले के वास्तविक तथ्यों पर सुनवाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 2020 में अदालत ने म्यांमार को अंतरिम निर्देश (Provisional Measures) देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा था कि वह नरसंहार सम्मेलन के अंतर्गत प्रतिबंधित कार्यों को रोके। इन निर्देशों में हत्या रोकना और ऐसी स्थितियों से बचाव करना शामिल है जो समुदाय के शारीरिक विनाश की ओर ले जा सकती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) केवल देशों के बीच विवादों का निपटारा करता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) व्यक्तिगत अपराधों की जांच करता है।
• 1948 का नरसंहार सम्मेलन सदस्य देशों को नरसंहार रोकने और उसे दंडित करने के लिए बाध्य करता है।
• ICJ द्वारा जारी किए गए Provisional Measures बाध्यकारी होते हैं।
• इस सम्मेलन के किसी भी सदस्य देश को, भले ही वह प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न हो, मुकदमा दायर करने का अधिकार है।
व्यापक कानूनी और राजनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई भविष्य में अन्य नरसंहार‑संबंधी मामलों के लिए एक मिसाल बन सकती है। जैसे कि हाल ही में दक्षिण अफ्रीका द्वारा गाजा में कथित नरसंहार के खिलाफ इज़राइल पर दर्ज मामले में। हालांकि ICJ के पास सीधे निर्णय को लागू कराने की शक्ति नहीं है, लेकिन अगर गाम्बिया के पक्ष में फैसला आता है, तो यह म्यांमार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को काफी बढ़ा सकता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) भी म्यांमार के सैन्य नेतृत्व के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच कर रहा है।
यह मामला न केवल रोहिंग्या समुदाय के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भूमिका और प्रभावशीलता पर भी एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है।