मौद्रिक नीति 2026: आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा, महंगाई पर सतर्क दृष्टि

मौद्रिक नीति 2026: आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा, महंगाई पर सतर्क दृष्टि

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केन्द्रीय बजट 2026 के बाद पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई को लेकर सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।

दरों और नीति रुख में कोई बदलाव नहीं

तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) की बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। मौद्रिक नीति का रुख भी “न्यूट्रल” (तटस्थ) रखा गया है, जिसका अर्थ है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में न तो कटौती की संभावना अधिक है और न ही वृद्धि की, जब तक कोई बड़ा आर्थिक परिवर्तन न हो।

आर्थिक विकास का मजबूत अनुमान

आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत स्थिति में बताया है। चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.4% अनुमानित की गई है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए 6.9% और दूसरी तिमाही के लिए 7% वृद्धि दर का पूर्वानुमान जताया गया है। इन आँकड़ों से संकेत मिलता है कि विकास की गति दीर्घकालिक रूप से बनी रह सकती है

महंगाई का अनुमान मामूली बढ़ा

हालांकि दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, परन्तु खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान थोड़ा बढ़ाया गया है। चालू वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई दर 2.1% बताई गई है, जबकि वर्तमान तिमाही के लिए यह 3.2% रहने की संभावना है। अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में 4% और 4.2% महंगाई का अनुमान है। यह दर्शाता है कि कीमतों का दबाव बना हुआ है, हालांकि यह अब भी आरबीआई के सहनशीलता दायरे (±2%) के भीतर है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
  • मौद्रिक नीति समिति (MPC) हर दो महीने में बैठक कर नीतिगत दरों का निर्धारण करती है।
  • RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य 4% है, जिसमें ±2% का सहनशील दायरा शामिल है।
  • “न्यूट्रल” नीति रुख का अर्थ है कि RBI को दरों में बढ़ोतरी या कटौती दोनों की स्वतंत्रता होती है।

उपभोक्ता संरक्षण और नियामकीय सुधार

नीतिगत दरों के अतिरिक्त, आरबीआई ने डिजिटल धोखाधड़ी से उपभोक्ताओं की रक्षा हेतु एक नई योजना की घोषणा की। इसके तहत ₹25,000 तक की क्षति होने पर ग्राहकों को मुआवज़ा देने का प्रस्ताव है। साथ ही, ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा गलत बिक्री (mis-selling), रिकवरी एजेंटों की आचार संहिता, और वसूली प्रथाओं पर भी ड्राफ्ट दिशानिर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

इन पहलों से यह स्पष्ट होता है कि आरबीआई अब केवल मौद्रिक स्थिरता तक सीमित नहीं, बल्कि वित्तीय संस्थाओं की जवाबदेही और उपभोक्ता हितों की रक्षा की दिशा में भी ठोस कदम उठा रहा है।

आरबीआई का यह निर्णय संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था संतुलन की स्थिति में है, जहाँ विकास की रफ्तार को बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई पर पैनी नजर और आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

Originally written on February 6, 2026 and last modified on February 6, 2026.

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