मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में सी-डॉट की ‘फ्रॉड प्रो’ तकनीक को वैश्विक पहचान

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में सी-डॉट की ‘फ्रॉड प्रो’ तकनीक को वैश्विक पहचान

भारत के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) को स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में अपनी स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली “फ्रॉड प्रो” के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इस नवाचार को ग्लोबल मोबाइल अवार्ड्स (ग्लोमो) में “बेस्ट नेटवर्क सिक्योरिटी एंड फ्रॉड प्रिवेंशन” श्रेणी में शीर्ष फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया। यह उपलब्धि भारत की उन्नत दूरसंचार तकनीक और साइबर सुरक्षा समाधान विकसित करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली

फ्रॉड प्रो एक एआई-संचालित सुरक्षा समाधान है जिसे सी-डॉट ने दूरसंचार नेटवर्क में धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम के लिए विकसित किया है। यह प्रणाली उन्नत विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिदम का उपयोग करके नेटवर्क गतिविधियों में संदिग्ध पैटर्न का पता लगाती है। बड़ी मात्रा में दूरसंचार डेटा का वास्तविक समय में विश्लेषण करके यह तकनीक वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान के दुरुपयोग और संदिग्ध संचार गतिविधियों जैसे संभावित खतरों की पहचान कर सकती है। इससे दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को समय रहते कार्रवाई करने और नेटवर्क तथा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

वैश्विक दूरसंचार मंच पर मान्यता

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में मिली यह मान्यता सी-डॉट को दूरसंचार सुरक्षा तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी वैश्विक नवाचारों के बीच स्थापित करती है। इस कार्यक्रम के दौरान दिए जाने वाले ग्लोबल मोबाइल अवार्ड्स दूरसंचार उद्योग में महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों को सम्मानित करते हैं। “बेस्ट नेटवर्क सिक्योरिटी एंड फ्रॉड प्रिवेंशन” श्रेणी में फाइनलिस्ट के रूप में चयन भारत की डिजिटल अवसंरचना और दूरसंचार अनुसंधान में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

स्वदेशी दूरसंचार नवाचार को बढ़ावा

संचार मंत्रालय के अनुसार यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी दूरसंचार नवाचार तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे यह साबित होता है कि भारत बड़े पैमाने पर डिजिटल संचार नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए उन्नत तकनीक विकसित करने की क्षमता रखता है। ऐसी उपलब्धियां घरेलू अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और वैश्विक दूरसंचार प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की भूमिका को विस्तार देने में सहायक हैं।

डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा

डिजिटल कनेक्टिविटी के तेजी से विस्तार के साथ दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा एक प्रमुख चुनौती बन गई है। साइबर धोखाधड़ी और नेटवर्क हमलों से बचाव के लिए आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। फ्रॉड प्रो जैसी तकनीकें यह दिखाती हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके दूरसंचार नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जा सकता है, जिससे डिजिटल संचार व्यवस्था मजबूत और सुरक्षित बनती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स दूरसंचार विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास संस्थान है।
  • मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार उद्योग आयोजनों में से एक है।
  • ग्लोबल मोबाइल अवार्ड्स दूरसंचार और मोबाइल तकनीक में उत्कृष्ट नवाचारों को सम्मानित करते हैं।
  • साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, विशेषकर नेटवर्क धोखाधड़ी की पहचान में।
Originally written on March 13, 2026 and last modified on March 13, 2026.

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