मोजतबा खामेनेई बन सकते हैं ईरान के अगले सर्वोच्च नेता
ईरान के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके पुत्र मोजतबा हुसैनी खामेनेई को देश का अगला सर्वोच्च नेता चुने जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की शक्तिशाली संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने उन्हें इस पद के लिए चयनित किया है। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान की राजनीतिक तथा धार्मिक नेतृत्व संरचना वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रारंभिक जीवन और धार्मिक शिक्षा
मोजतबा हुसैनी खामेनेई का जन्म वर्ष 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे आयतुल्ला अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े पुत्र हैं। उनका बचपन उस दौर में बीता जब ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद बड़े राजनीतिक परिवर्तन हुए थे। इस क्रांति ने शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन को समाप्त कर इस्लामी गणराज्य की स्थापना की थी।
क्रांति के बाद उनका परिवार तेहरान चला गया, जहां मोजतबा ने अलावी हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। यह संस्थान ईरान के शासक वर्ग से जुड़े कई लोगों को शिक्षा देने के लिए जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने क़ोम शहर में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की, जो ईरान का प्रमुख इस्लामी अध्ययन केंद्र है। हालांकि कई वर्षों तक धार्मिक अध्ययन करने के बावजूद उन्हें अभी तक आयतुल्ला की उपाधि प्राप्त नहीं हुई है, जो सामान्यतः सर्वोच्च नेता पद के लिए धार्मिक वैधता को मजबूत करती है।
सुरक्षा प्रतिष्ठान से संबंध
1980 के दशक में ईरान–इराक युद्ध के दौरान मोजतबा खामेनेई ने हबीब बटालियन में सेवा दी थी। इस अनुभव ने उन्हें ईरान के सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों के साथ संबंध स्थापित करने का अवसर दिया। समय के साथ उन्हें सर्वोच्च नेता के कार्यालय में पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला व्यक्ति माना जाने लगा।
विश्लेषकों के अनुसार उनका प्रभाव मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ करीबी संबंधों के कारण है। आईआरजीसी ईरान की एक शक्तिशाली सैन्य और आर्थिक संस्था है, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और राजनीतिक रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव रखती है।
विवाद और अंतरराष्ट्रीय आलोचना
मोजतबा खामेनेई कई बार अंतरराष्ट्रीय विवादों और आलोचनाओं का केंद्र भी रहे हैं। वर्ष 2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि उनके पिता ने अपने अधिकारों का कुछ हिस्सा उन्हें सौंप दिया था, जबकि उनके ऊपर औपचारिक जवाबदेही नहीं थी।
कुछ सुधारवादी राजनेताओं और विदेशी सरकारों ने उन पर चुनावों को प्रभावित करने और सुरक्षा कार्रवाईयों का समर्थन करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि ईरानी सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उनका वैश्विक स्तर पर निवेश और संपत्तियों का नेटवर्क हो सकता है, हालांकि उनकी वास्तविक संपत्ति का आकार स्पष्ट नहीं है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ईरान का सर्वोच्च नेता देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है, जो सेना, न्यायपालिका और प्रमुख राज्य संस्थाओं की देखरेख करता है।
- असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स 88 सदस्यीय धार्मिक निकाय है, जो सर्वोच्च नेता का चयन और उसकी निगरानी करता है।
- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ईरान की एक शक्तिशाली सैन्य संस्था है, जिसका राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव है।
- वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में राजशाही समाप्त होकर इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई थी।
यदि मोजतबा खामेनेई औपचारिक रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता बनते हैं, तो यह देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद क्षण माना जाएगा। इस्लामी गणराज्य की स्थापना वंशानुगत शासन के विरोध में हुई थी, इसलिए पिता से पुत्र को सत्ता का हस्तांतरण कई विश्लेषकों के अनुसार राजवंशीय उत्तराधिकार जैसा दिखाई दे सकता है। आने वाले समय में उनकी नेतृत्व क्षमता काफी हद तक धार्मिक प्रतिष्ठानों और सुरक्षा संस्थाओं के समर्थन पर निर्भर करेगी।