मेळघाट टाइगर रिज़र्व में 15 संकटग्रस्त भारतीय गिद्धों को छोड़ा गया: विलुप्त प्रजाति पुनरुत्थान की दिशा में बड़ा कदम

मेळघाट टाइगर रिज़र्व में 15 संकटग्रस्त भारतीय गिद्धों को छोड़ा गया: विलुप्त प्रजाति पुनरुत्थान की दिशा में बड़ा कदम

भारत में वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई गति देते हुए, हाल ही में 15 गंभीर रूप से संकटग्रस्त भारतीय गिद्धों को महाराष्ट्र के मेळघाट टाइगर रिज़र्व के सोमठाणा रेंज में प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। यह कदम एक दीर्घकालिक प्रजाति पुनरुत्थान कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उपमहाद्वीप में तेजी से घटती गिद्ध आबादी को पुनर्जीवित करना है।

स्थानांतरण और पूर्व-प्रवर्तन अनुकूलन प्रक्रिया

इन गिद्धों को अप्रैल 2025 में हरियाणा के पिंजौर स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र से मेळघाट लाया गया था। इसके बाद इन्हें एक विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पूर्व-रिलीज़ एवीएरी में रखा गया, जिससे वे स्थानीय जलवायु, भोजन की उपलब्धता और भौगोलिक स्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें। यह चरण प्रकृति में छोड़े जाने से पहले उनके जीवित रहने की संभावना बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

ट्रैकिंग, “सॉफ्ट रिलीज़” और निगरानी

दिसंबर 2025 में सभी गिद्धों को GSM और सैटेलाइट ट्रैकिंग डिवाइसेज़ से लैस किया गया, जिससे इनके स्थान, उड़ान और जीवित रहने की निगरानी की जा सके। 2 जनवरी से “सॉफ्ट रिलीज़” की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें पिंजरे के द्वार दूर से खोले गए और बाहर भोजन रखा गया ताकि पक्षी स्वाभाविक रूप से बाहर निकलें। वैज्ञानिक इनके जंगल में अनुकूलन और भ्रमण पैटर्न पर निरंतर नज़र रखेंगे।

संरक्षण के सामने चुनौतियाँ

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के संरक्षण वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रयास को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें भोजन की सीमित उपलब्धता, आसपास मौजूदा गिद्ध आबादी की अनुपस्थिति (जो मार्गदर्शन में सहायक होती), और हानिकारक पशु औषधियों—विशेषकर डाइक्लोफेनाक—की उपस्थिति प्रमुख थीं। इन जोखिमों को कम करने के लिए स्थानीय गौशालाओं के साथ साझेदारी कर सुरक्षित मवेशी शवों की आपूर्ति और फ़ीडिंग स्टेशन की व्यवस्था की गई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय गिद्धों को IUCN द्वारा गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
  • पशुओं में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनाक दवा ने गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट लाई थी।
  • मेळघाट टाइगर रिज़र्व मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र है।
  • BNHS (Bombay Natural History Society) भारत के सबसे पुराने वन्यजीव अनुसंधान संगठनों में से एक है।

मध्य भारत में गिद्ध पुनरुत्थान की उम्मीद

गिद्धों की रिहाई में शामिल वन अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने मेळघाट को गिद्ध पुनरुत्थान के लिए उपयुक्त बताया है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से लंबी चोंच वाले गिद्धों का प्राकृतिक आवास रहा है। उम्मीद है कि ये छोड़े गए गिद्ध धीरे-धीरे एक स्थायी प्रजनन आबादी स्थापित करेंगे, जिससे मृत पशु निपटान और रोग नियंत्रण जैसी पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को फिर से मजबूत किया जा सकेगा।

Originally written on January 7, 2026 and last modified on January 7, 2026.

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