मेलबर्न में महात्मा गांधी की प्रतिमा चोरी: भारतीय समुदाय में आक्रोश, राजनयिक चिंता गहराई
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थित ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर से महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा की चोरी ने न केवल भारतीय समुदाय में गहरा आक्रोश उत्पन्न किया है, बल्कि यह घटना एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और राजनयिक मुद्दा बन गई है। भारत द्वारा भेंट की गई 426 किलोग्राम वजनी इस प्रतिमा की चोरी की जांच अब ऑस्ट्रेलियाई पुलिस द्वारा की जा रही है।
मेलबर्न के समुदायिक केंद्र से हुई चोरी
यह घटना सोमवार को मेलबर्न के रोवविल उपनगर में दिन के मध्य घटी, जब तीन अज्ञात व्यक्ति प्रतिमा को उसके चबूतरे से काटकर ले गए। पुलिस के अनुसार, अपराधियों ने एंगल ग्राइंडर का उपयोग कर प्रतिमा को काटा और एक सफेद वैन में ले जाकर फरार हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि प्रतिमा केवल टखनों तक बची हुई है और शेष भाग गायब है।
सांस्कृतिक और कूटनीतिक महत्व
यह प्रतिमा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा भारत सरकार की ओर से भेंट की गई थी। इसे शांति, अहिंसा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया था। गांधी जी की यह प्रतिमा भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र बिंदु थी। इसकी चोरी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक महत्वपूर्ण प्रतीक को नुकसान पहुंचाया है।
सीसीटीवी साक्ष्य और पुलिस जांच
ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी चैरिटेबल ट्रस्ट के अनुसार, पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। फुटेज में दिखा कि अपराधी नकाब पहने हुए थे और उन्होंने अपने वाहन को सावधानीपूर्वक पार्क किया था। पुलिस को वीडियो साक्ष्य सौंप दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) भारत के विदेश मंत्रालय के तहत कार्य करती है।
- महात्मा गांधी की प्रतिमाएं विश्वभर में शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में स्थापित हैं।
- सांस्कृतिक प्रतीकों पर हमले प्रायः राजनयिक और सामुदायिक तनाव को जन्म देते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया विश्व के सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक की मेजबानी करता है।
उग्रवाद और सांस्कृतिक हमलों को लेकर चिंता
भारतीय समुदाय के नेताओं ने इस घटना को ऑस्ट्रेलिया में हाल के वर्षों में बढ़ते सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों पर हमलों की कड़ी में देखा है। ऐसी घटनाओं को अक्सर खालिस्तान-समर्थक उग्रवादी समूहों से जोड़ा गया है, जो पहले भी भारतीय दूतावासों और मंदिरों को निशाना बना चुके हैं। गांधी प्रतिमा की चोरी ने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और सांस्कृतिक प्रतीकों की रक्षा को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है।
यह घटना सिर्फ एक मूर्ति की चोरी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक सद्भावना और भारतीय पहचान पर हमला मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विदेशों में स्थित भारतीय संस्थानों और प्रतीकों की सुरक्षा के लिए अधिक सुदृढ़ प्रयासों की आवश्यकता है।