मेघालय कैबिनेट के अहम फैसले: राजकोषीय छूट और अस्थायी कर्मियों को नियमित अवसर
मेघालय सरकार ने अपने वित्तीय ढांचे को लचीला बनाने और भर्ती प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। राज्य मंत्रिमंडल ने राजकोषीय अनुशासन अधिनियम में संशोधन के साथ-साथ अस्थायी कर्मियों को सरकारी सेवा में नियमित अवसर देने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन निर्णयों का मकसद राज्य की विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बढ़ाना और लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को रोजगार सुरक्षा प्रदान करना है।
वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम में संशोधन
कैबिनेट ने Meghalaya Fiscal Responsibility and Budget Management (FRBM) Act, 2006 में संशोधन को मंजूरी दी है। इस संशोधन के तहत राज्य को अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3% से बढ़ाकर 3.5% तक का राजकोषीय घाटा रखने की अनुमति दी गई है। यह परिवर्तन केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिससे मेघालय को अतिरिक्त उधारी का अवसर मिलेगा।इससे राज्य सरकार को सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय बढ़ाने की सुविधा होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त उधारी के साथ-साथ सावधानीपूर्वक ऋण प्रबंधन भी आवश्यक है ताकि यह राशि उत्पादक परिसंपत्तियों में निवेशित हो और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
नियमित अस्थायी कर्मियों के लिए 50% आरक्षण
कैबिनेट ने Meghalaya Ministerial District Establishment Service Rules, 2017 के नियम 6(D) में भी संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत अब राज्य के ‘ग्रुप D’ पदों में 50% पद नियमित अस्थायी कर्मियों (Regular Casual Workers) के लिए आरक्षित रहेंगे। यह निर्णय उन कर्मियों की सेवा और योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो वर्षों से सरकारी कार्यालयों में कार्यरत हैं।इस संशोधन से ऐसे कर्मियों को नियमित रोजगार, पेंशन, और अन्य लाभों का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आजीविका और कार्यस्थिरता में सुधार होगा।
उपभोक्ता विवाद आयोग के लिए नई सेवा नियमावली
राज्य मंत्रिमंडल ने Meghalaya State Consumer Disputes Redressal Commission के लिए नई सेवा नियमावली को भी स्वीकृति दी है। इन नियमों के तहत आयोग को अपना स्वतंत्र भर्ती बोर्ड गठित करने का अधिकार दिया गया है। इससे आयोग में कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज होगी और उपभोक्ता विवाद निवारण प्रणाली अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बन सकेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मेघालय का FRBM अधिनियम वर्ष 2006 में लागू किया गया था।
- राज्य का राजकोषीय घाटा सीमा 3% से बढ़ाकर 3.5% कर दी गई है।
- ग्रुप D पदों में 50% आरक्षण नियमित अस्थायी कर्मियों के लिए होगा।
- उपभोक्ता विवाद आयोग अब अपना भर्ती बोर्ड स्वयं गठित कर सकेगा।
मेघालय सरकार के इन निर्णयों से यह स्पष्ट है कि राज्य अब एक ओर अपने वित्तीय प्रबंधन को अधिक लचीला और सक्षम बनाने पर ध्यान दे रहा है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और संस्थागत क्षमता को भी सुदृढ़ कर रहा है। यह नीति संतुलन आने वाले वर्षों में राज्य की विकास योजनाओं को गति देने में सहायक सिद्ध हो सकती है।