मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य में नौ नई प्रजातियों की खोज

मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य में नौ नई प्रजातियों की खोज

तमिलनाडु के मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) द्वारा किए गए हालिया जीव-जंतु सर्वेक्षण में नौ नई प्रजातियों की खोज की गई है। यह खोज इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को उजागर करती है और संरक्षित क्षेत्रों में वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के महत्व को रेखांकित करती है। पश्चिमी घाट के महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र के रूप में मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य पहले से ही संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, और यह नई खोज इसकी पारिस्थितिक महत्ता को और मजबूत करती है।

स्थान और संरक्षण महत्व

मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य तमिलनाडु के थेनी जिले में स्थित है। यह अभयारण्य तमिलनाडु और केरल की सीमा के पास स्थित है और केरल के प्रसिद्ध पेरियार टाइगर रिजर्व के लिए एक महत्वपूर्ण बफर जोन के रूप में कार्य करता है। पश्चिमी घाट जैव विविधता हॉटस्पॉट के भीतर स्थित होने के कारण यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण गलियारों को बनाए रखने और विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाता है।

वनस्पति और आवास की विविधता

मेगामलाई क्षेत्र में ऊँचाई के अनुसार विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। पहाड़ियों के निचले हिस्सों में झाड़ीदार वन प्रमुख हैं। ऊँचाई बढ़ने के साथ यह क्षेत्र घने सदाबहार वनों में परिवर्तित हो जाता है और ऊँचे क्षेत्रों में शोलाघास के मैदान पाए जाते हैं। इस प्रकार की पारिस्थितिक विविधता कई प्रकार के पौधों और जीवों को अनुकूल आवास प्रदान करती है, जिससे यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

अभयारण्य की वनस्पति विविधता

मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य पश्चिमी घाट की विशिष्ट वनस्पति के लिए जाना जाता है। यहाँ बरगद का पेड़, सिज़ीजियम ज़ेलैनिकम, नोटोफेजिया वज्रावेलुई, मेमेसीलोन फ्लावेसेंस, सिम्प्लोकोस ओलिगांद्रा, सिम्प्लोकोस वायनाडेंस और मेयोगाइन रामारोवी जैसी महत्वपूर्ण पौध प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ये पौधे वन पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना को मजबूत बनाते हैं और अनेक पशु प्रजातियों को भोजन तथा आवास उपलब्ध कराते हैं।

मेगामलाई की जीव-जंतु विविधता

यह अभयारण्य पश्चिमी घाट के विशिष्ट वन्यजीवों का आवास है। यहाँ हाथी, बाघ, तेंदुआ, नीलगिरि तहर और गौर जैसे प्रमुख स्तनधारी पाए जाते हैं। इसके अलावा चीतल, काकड़ (बार्किंग डियर), सांभर, जंगली सूअर, साही, नीलगिरि लंगूर और संकटग्रस्त शेर-पूंछ मकाक भी इस क्षेत्र में देखे जाते हैं। यह क्षेत्र कई स्थानिक सरीसृप प्रजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनमें वुड स्नेक विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य तमिलनाडु के थेनी जिले में केरल सीमा के पास स्थित है।
  • यह केरल के पेरियार टाइगर रिजर्व के लिए एक महत्वपूर्ण बफर जोन के रूप में कार्य करता है।
  • भारतीय प्राणी सर्वेक्षण द्वारा किए गए सर्वेक्षण में यहाँ नौ नई प्रजातियों की खोज हुई है।
  • मेगामलाई क्षेत्र में पाया जाने वाला वुड स्नेक एक स्थानिक सरीसृप प्रजाति है।

मेगामलाई वन्यजीव अभयारण्य में नई प्रजातियों की खोज यह दर्शाती है कि पश्चिमी घाट अभी भी जैव विविधता के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध और कम खोजे गए क्षेत्रों में से एक है। ऐसे वैज्ञानिक अध्ययन न केवल नई प्रजातियों की पहचान में मदद करते हैं, बल्कि भविष्य की संरक्षण नीतियों और पारिस्थितिक प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

Originally written on March 16, 2026 and last modified on March 16, 2026.

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