मेक्सिको के एल चिचोन ज्वालामुखी में असामान्य परिवर्तन: भूतापीय प्रणाली की गतिविधि ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
मेक्सिको के एल चिचोन ज्वालामुखी में हाल के महीनों में देखे गए भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। यद्यपि वर्तमान में किसी विस्फोट का तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह ज्वालामुखी अब भू-रसायन की दृष्टि से अस्थिर हो चुका है और इसे गहन निगरानी की आवश्यकता है।
बढ़ता तापमान और गैस उत्सर्जन
जून से दिसंबर 2025 के बीच, ज्वालामुखी की क्रेटर झील में तापमान बार-बार 118°C तक पहुंच गया, जो सामान्य भूतापीय स्तर से कहीं अधिक है। वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों के उत्सर्जन में भी वृद्धि देखी है। यद्यपि ये गैसें ज्वालामुखी प्रणालियों में सामान्य हैं, परन्तु बंद झीलों के वातावरण में इनका संकेंद्रण घातक स्तर तक पहुंच सकता है।
सल्फर गोले और रासायनिक असंतुलन
नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मैक्सिको के वैज्ञानिकों ने झील की सतह पर खोखले सल्फर के गोले तैरते हुए देखे, जो तब बनते हैं जब गैसें झील के नीचे स्थित पिघले हुए सल्फर के माध्यम से निकलती हैं। झील का रंग हरे से भूरे की ओर बदल गया है, जो सल्फेट और सिलिका की बढ़ी हुई मात्रा को दर्शाता है। क्लोराइड स्तर में तीव्र उतार-चढ़ाव यह संकेत देते हैं कि नीचे की जल-प्रवाह प्रणाली में बदलाव हो रहा है।
1982 के विस्फोट की भयावह स्मृति
वर्तमान गतिविधियों को 1982 की प्रलयंकारी घटना की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जब इस ज्वालामुखी के विस्फोट ने 2000 से अधिक लोगों की जान ली थी और कई बस्तियाँ नष्ट हो गई थीं। इस घटना ने इतनी अधिक मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड वायुमंडल में छोड़ा कि इससे अस्थायी रूप से वैश्विक तापमान में गिरावट देखी गई। उसी विस्फोट के परिणामस्वरूप आज की क्रेटर झील बनी, जो अब ज्वालामुखी के भीतरी परिवर्तनों का संवेदनशील संकेतक बन गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एल चिचोन ज्वालामुखी मेक्सिको के चियापास राज्य में स्थित है।
- 1982 का विस्फोट आधुनिक मैक्सिकन इतिहास का सबसे घातक ज्वालामुखी विस्फोट था।
- हाइड्रोथर्मल गतिविधि में गरम जल और गैस शामिल होते हैं, न कि मैग्मा का विस्थापन।
- फ्रियाटिक विस्फोट (Phreatic Eruption) भाप आधारित होते हैं और बिना पूर्व चेतावनी भी हो सकते हैं।
निगरानी में कमी और भविष्य के जोखिम
वर्तमान में एल चिचोन “पीली चेतावनी, चरण दो” पर है, जो असामान्य लेकिन विस्फोटरहित गतिविधि को दर्शाता है। हालांकि, रीयल-टाइम निगरानी में कमी के कारण जोखिम का सटीक आकलन करना कठिन है। CENAPRED जैसे संस्थान अब ड्रोन और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग कर निगरानी को और मजबूत कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भले ही मैग्मा का ऊपर उठना संभावित नहीं, लेकिन भाप से प्रेरित विस्फोट अभी भी संभव हैं।
ऐसे परिदृश्य में, सामुदायिक जागरूकता और सतत निगरानी ही सुरक्षा की कुंजी हैं। एल चिचोन की बदलती गतिविधि यह याद दिलाती है कि ज्वालामुखी की सतह शांत हो सकती है, लेकिन उसके भीतर की प्रणाली कभी भी अप्रत्याशित बदलाव ला सकती है।