मृत अंगदान में तमिलनाडु फिर बना देश का अग्रणी राज्य

मृत अंगदान में तमिलनाडु फिर बना देश का अग्रणी राज्य

तमिलनाडु ने मृत अंगदान के क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को एक बार फिर मजबूत किया है। वर्ष 2026 के पहले दो महीनों में राज्य में 57 मृत अंगदाता दर्ज किए गए, जो लगभग प्रतिदिन एक अंगदान के बराबर है। इस कार्यक्रम का संचालन तमिलनाडु ट्रांसप्लांट अथॉरिटी (ट्रान्सटन) द्वारा किया जाता है, जिसने पिछले लगभग दो दशकों में एक व्यवस्थित और पारदर्शी प्रणाली विकसित की है। अधिकारियों के अनुसार इस सफलता के पीछे समन्वित प्रशासन, जनता का विश्वास और तकनीकी एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण कारक हैं।

प्रारंभिक पहल और संस्थागत ढांचा

तमिलनाडु ने वर्ष 2008 में ही मृत अंगदान प्रणाली को औपचारिक रूप देना शुरू कर दिया था, जब देश के अधिकांश हिस्सों में इसके बारे में जागरूकता सीमित थी। इस मॉडल में नीति-निर्माता, स्वास्थ्य प्रशासक, तकनीकी विशेषज्ञ, पुलिस विभाग, मीडिया और नागरिक समाज संगठनों का समन्वित सहयोग शामिल है।

कोविड-19 महामारी के दौरान इस कार्यक्रम की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ी थी, लेकिन उसके बाद इसमें फिर से तेजी आई है। इस प्रणाली के तहत अंगों का वैज्ञानिक तरीके से आवंटन, मृतक के परिवारों को संवेदनशील परामर्श और विभिन्न प्रत्यारोपण केंद्रों के बीच त्वरित समन्वय सुनिश्चित किया जाता है। पिछले दो वर्षों में सरकारी अस्पतालों ने भी मृत अंगों के प्राप्त करने में निजी अस्पतालों के बराबर या उनसे अधिक योगदान दिया है।

कार्यक्रम को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहल

तमिलनाडु में मृत अंगदान कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इनमें ‘ऑनर वॉक’ की परंपरा प्रमुख है, जिसमें मृत अंगदाताओं को सार्वजनिक सम्मान दिया जाता है। वर्ष 2023 से अब तक 650 से अधिक ऑनर वॉक आयोजित किए जा चुके हैं, जिससे समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ है।

इसके अलावा सरकारी आदेश संख्या 331 के तहत मृत अंगदाताओं को राज्य सम्मान प्रदान किया जाता है। पुलिस विभाग के सहयोग से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाए जाते हैं, जिससे अस्पतालों के बीच अंगों का तेजी से परिवहन संभव हो पाता है। वर्ष 2021 में ‘विदियाल’ मोबाइल और वेब एप्लीकेशन लॉन्च की गई, जिससे अंगों के आवंटन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित हो गई। साथ ही मेडिकल छात्रों को भी जागरूकता अभियान के लिए राजदूत के रूप में शामिल किया गया है।

सार्वजनिक विश्वास और नैतिक मानक

अधिकारियों के अनुसार इस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्वैच्छिक सहमति है। मृतक के परिवारों को संवेदनशील तरीके से परामर्श दिया जाता है और किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाता। प्रारंभिक परामर्श के बाद लगभग 75 प्रतिशत परिवार अंगदान के लिए सहमत हो जाते हैं, जबकि आगे की बातचीत के बाद यह संख्या लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

राज्य सरकार ने अंगदान के लिए किसी प्रकार का आर्थिक प्रोत्साहन देने से भी परहेज किया है। अधिकारियों का मानना है कि अंगदान को केवल एक स्वैच्छिक और महान मानवीय कार्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तमिलनाडु ने वर्ष 2008 में मृत अंगदान के लिए एक संगठित प्रणाली की शुरुआत की थी।
  • ‘ग्रीन कॉरिडोर’ विशेष यातायात व्यवस्था होती है, जिसके माध्यम से अंगों को तेजी से अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है।
  • सरकारी आदेश 331 के तहत मृत अंगदाताओं को राज्य सम्मान प्रदान किया जाता है।
  • तमिलनाडु में अंगों का आवंटन एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है।

हालांकि तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है, लेकिन अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि अंगदान केवल दुर्घटनाओं से होने वाली ब्रेन-डेथ तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य चिकित्सीय कारणों से होने वाले मामलों से भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। पारदर्शिता, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता पर आधारित तमिलनाडु का मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श प्रणाली के रूप में देखा जा रहा है।

Originally written on March 4, 2026 and last modified on March 4, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *