मीथेन सुपर-एमिटर: जलवायु संकट का छिपा हुआ खतरा
हाल के शोध में सैटेलाइट तकनीक के माध्यम से यह सामने आया है कि दुनिया के कुछ सीमित तेल और गैस स्थल अत्यधिक मात्रा में मीथेन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। विशेष रूप से तुर्कमेनिस्तान 2025 में सबसे बड़े “सुपर-एमिटर” क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आया है। यह स्थिति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए ऐसे केंद्रित और उच्च-प्रभाव वाले स्रोतों पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है।
तुर्कमेनिस्तान बना प्रमुख उत्सर्जन केंद्र
अध्ययन के अनुसार, विश्व के शीर्ष 25 मीथेन उत्सर्जन स्थलों में से लगभग 15 तुर्कमेनिस्तान में स्थित हैं। इसके अलावा ईरान, वेनेजुएला, अमेरिका के टेक्सास और पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में भी बड़े उत्सर्जन केंद्र पाए गए हैं। कुल मिलाकर लगभग 2,500 तेल और गैस सुविधाओं में 4,400 से अधिक मीथेन प्लूम दर्ज किए गए, जो इस समस्या की व्यापकता को स्पष्ट करते हैं।
उच्च उत्सर्जन के प्रमुख कारण
इन “सुपर-एमिटर” स्थलों से प्रति घंटे 3.7 से 10.5 मीट्रिक टन तक मीथेन का उत्सर्जन होता है। इसके पीछे मुख्य कारण उपकरणों में रिसाव, फ्लेयरिंग प्रक्रिया की अक्षमता और बुनियादी ढांचे का खराब रखरखाव हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर निगरानी और मरम्मत की जाए, तो इन उत्सर्जनों को काफी हद तक रोका जा सकता है, जिससे यह समस्या नियंत्रण में लाई जा सकती है।
जलवायु परिवर्तन में मीथेन की भूमिका
मीथेन एक अत्यधिक प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैस है, जिसका तापवर्धक प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं अधिक होता है। यह लगभग 12 वर्षों तक वायुमंडल में बना रहता है, लेकिन इस अवधि में यह CO₂ से कई गुना अधिक गर्मी को रोकता है। औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक तापमान वृद्धि में इसका योगदान लगभग 30 प्रतिशत माना जाता है। यहां तक कि एक बड़े मीथेन रिसाव का प्रभाव लाखों वाहनों के उत्सर्जन के बराबर हो सकता है।
भारत का संदर्भ और अन्य स्रोत
मीथेन उत्सर्जन केवल तेल और गैस उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लैंडफिल, कृषि और अपशिष्ट जल प्रणालियों से भी उत्पन्न होता है। भारत में दिल्ली का गाजीपुर लैंडफिल एक प्रमुख उदाहरण है, जहां जैविक कचरे के विघटन से भारी मात्रा में मीथेन निकलती है। यह स्थिति बताती है कि प्रभावी कचरा प्रबंधन और गैस नियंत्रण उपायों की कितनी आवश्यकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो CO₂ से कई गुना अधिक ताप को अवशोषित करती है।
- तुर्कमेनिस्तान वैश्विक मीथेन सुपर-एमिटर स्थलों का प्रमुख केंद्र है।
- तेल और गैस उद्योग मीथेन उत्सर्जन के मुख्य स्रोतों में शामिल हैं।
- सैटेलाइट तकनीक से मीथेन उत्सर्जन की निगरानी और पहचान संभव हुई है।
यह स्पष्ट है कि मीथेन उत्सर्जन को कम करना जलवायु परिवर्तन से निपटने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। यदि इन उच्च-उत्सर्जन स्रोतों पर समय रहते नियंत्रण किया जाए, तो वैश्विक तापमान वृद्धि को धीमा करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की जा सकती है।