मिस्र की कब्रगाहों में मिले तमिल-ब्राह्मी अभिलेख, रोमन युग में तमिलागम के संपर्क के प्रमाण

मिस्र की कब्रगाहों में मिले तमिल-ब्राह्मी अभिलेख, रोमन युग में तमिलागम के संपर्क के प्रमाण

प्राचीन तमिलागम और रोमन विश्व के बीच घनिष्ठ व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाने वाली एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। मिस्र के थेबन नेक्रोपोलिस स्थित ‘वैली ऑफ द किंग्स’ की छह कब्रों के भीतर लगभग 30 अभिलेखों की पहचान की गई है, जो पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच के माने जा रहे हैं। इन अभिलेखों को 2024–25 के दौरान पेरिस स्थित फ्रेंच स्कूल ऑफ एशियन स्टडीज की शार्लोट श्मिट और लॉज़ेन विश्वविद्यालय के इंगो स्ट्राउख द्वारा प्रलेखित किया गया।

वैली ऑफ द किंग्स, जो मिस्र के थेबन नेक्रोपोलिस में स्थित है, प्राचीन मिस्र के शाही मकबरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां दीवारों और गलियारों पर मिले ये अभिलेख संक्षिप्त ‘ग्रैफिटी’ के रूप में हैं, जिन्हें आगंतुकों ने अपने नाम अंकित करने की प्रथा के तहत उकेरा था। इसी स्थान पर पूर्व में 1926 में फ्रांसीसी विद्वान जूल्स बाये ने 2,000 से अधिक यूनानी ग्रैफिटी अभिलेख दर्ज किए थे।

तमिल-ब्राह्मी, प्राकृत और संस्कृत में मिले ये नए अभिलेख बहुभाषी संदर्भ में पाए गए हैं, जो संकेत देते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप के व्यापारी या यात्री रोमन काल में मिस्र की इन कब्रगाहों तक पहुंचे थे।

अभिलेखों में ‘चिकै कोṟṟाṉ’ नाम आठ बार पांच अलग-अलग कब्रों में अंकित मिला है। ‘कोṟṟाṉ’ शब्द तमिल मूल ‘कोṟṟम’ से जुड़ा है, जिसका अर्थ विजय या वध से संबंधित है। यह शब्द चेरा योद्धा देवी कोṟṟवै और ‘कोṟṟवṉ’ (राजा) उपाधि से भी संबद्ध है।

इसी प्रकार ‘कोṟṟपुमान’ नाम का उल्लेख पहले मिस्र के रेड सी तटवर्ती बंदरगाह बेरेनिके में मिले एक मिट्टी के बर्तन के टुकड़े पर भी पाया गया था। संगम साहित्य, विशेषकर ‘पुरनानूरु’, में चेरा शासक पिट्टांकोṟṟाṉ का उल्लेख मिलता है। अन्य अभिलेखों में ‘कोपान वरत कंतन’ (कोपान आया और देखा), ‘सातन’ और ‘किरन’ जैसे नाम भी दर्ज हैं।

विद्वानों का मानना है कि अधिकांश व्यक्तियों का संबंध दक्षिण भारत, विशेषकर प्राचीन तमिलागम से था। यह खोज मालाबार तट और रोमन साम्राज्य के बीच प्राचीन समुद्री व्यापार के प्रमाणों को और सुदृढ़ करती है।

बेरेनिके में पहले भी भारतीय वस्तुओं और अभिलेखों की खोज हो चुकी है, जो लाल सागर के माध्यम से भारत और रोम के बीच वाणिज्यिक संपर्क को दर्शाते हैं। नई खोज बंदरगाह शहरों से आगे बढ़कर नील घाटी तक भारतीय उपस्थिति का संकेत देती है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान की गहराई स्पष्ट होती है।

  • तमिल-ब्राह्मी लिपि का उपयोग दक्षिण भारत में लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से होता रहा है।
  • बेरेनिके लाल सागर का एक प्रमुख बंदरगाह था, जो भारत और रोमन साम्राज्य को जोड़ता था।
  • संगम साहित्य में चेरा, चोल और पांड्य शासकों के प्रारंभिक उल्लेख मिलते हैं।
  • वैली ऑफ द किंग्स मिस्र के थेबन नेक्रोपोलिस में स्थित है और शाही मकबरों के लिए प्रसिद्ध है।

ये अभिलेख प्रारंभिक वैश्वीकरण के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। वे केवल व्यापारिक संपर्क ही नहीं, बल्कि लोगों की आवाजाही, सांस्कृतिक संपर्क और साझा ऐतिहासिक स्थलों के उपयोग को भी दर्शाते हैं। यह खोज तमिलागम, उत्तर-पश्चिम भारत और रोमन साम्राज्य के बीच प्राचीन अंतरमहाद्वीपीय नेटवर्क की नई समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

Originally written on February 13, 2026 and last modified on February 13, 2026.

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