मिट्टी में छिपा फॉस्फोरस प्रदूषण: अमेरिकी कृषि की एक अदृश्य समस्या
कृषि प्रदूषण अक्सर दिखाई देने वाले रसायनिक बहाव या अत्यधिक उर्वरक उपयोग से जुड़ा माना जाता है, लेकिन अमेरिका में एक अधिक जटिल और दीर्घकालिक समस्या मिट्टी के भीतर छिपी हुई है—फॉस्फोरस का संचय। दशकों से खेतों में आवश्यक मात्रा से कई गुना अधिक फॉस्फोरस डाला गया है, जिससे यह अब पर्यावरण और जल स्रोतों के लिए खतरा बन गया है।
फॉस्फोरस का अत्यधिक उपयोग कैसे हुआ
फॉस्फोरस, नाइट्रोजन और पोटेशियम के साथ, पौधों के लिए तीन प्रमुख पोषक तत्वों में से एक है। अमेरिकी किसानों ने कई वर्षों तक यह सुनिश्चित करने के लिए फॉस्फोरस उर्वरक डाला कि फसलें पोषण की कमी से न मरें। चूंकि यह अपेक्षाकृत सस्ता और ‘पर्यावरण के लिए सुरक्षित’ माना जाता था—क्योंकि यह मिट्टी के कणों से मजबूती से जुड़ जाता है और नाइट्रोजन की तरह वाष्पित नहीं होता—इसलिए इसकी नियमित रूप से अधिक मात्रा में आपूर्ति की जाती रही। इसने legacy phosphorus की समस्या को जन्म दिया, जिसमें पहले से मौजूद फॉस्फोरस की गणना किए बिना बार-बार उर्वरक डाला गया।
संचय की भयावहता
1950 के दशक से अमेरिका में फॉस्फोरस उर्वरकों का उपयोग लगातार बढ़ा है। 1960 में जहाँ लगभग 5.8 मिलियन टन फॉस्फेट उर्वरक प्रयोग किया गया, वहीं 2007 तक यह 8.5 मिलियन टन से अधिक हो गया। अकेले मक्का (कॉर्न) की खेती में 2000 से 2018 के बीच फॉस्फोरस उपयोग में लगभग 30% की वृद्धि हुई। लेकिन पौधे केवल सीमित मात्रा ही अवशोषित करते हैं—बाकी मिट्टी में रह जाता है। फ्लोरिडा जैसे क्षेत्रों में यह मात्रा अब कृषि आवश्यकताओं से 10 गुना अधिक हो गई है।
मिट्टी से जल तक: प्रदूषण की श्रृंखला
हालाँकि फॉस्फोरस सामान्यतः मिट्टी में बंधा रहता है, परंतु वर्षा, सिंचाई और कटाव के जरिए यह जल स्रोतों में पहुँच सकता है। इससे eutrophication (जल में अत्यधिक पोषक तत्वों की उपस्थिति) और algal bloom जैसी समस्याएँ होती हैं। फ्लोरिडा एवरग्लेड्स और मेक्सिको की खाड़ी जैसे क्षेत्रों में इसका गंभीर पारिस्थितिकीय प्रभाव देखा गया है। इन झीलों और नदियों में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि जल में ऑक्सीजन की कमी (डेड जोन) और पीने के पानी की गुणवत्ता में गिरावट ला रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- फॉस्फोरस एक आवश्यक पौध पोषक तत्व है, परंतु अत्यधिक मात्रा में यह eutrophication का कारण बनता है।
- Legacy phosphorus उस फॉस्फोरस को कहते हैं जो वर्षों के उर्वरक उपयोग से मिट्टी में जमा हो गया है।
- Dead zones वे क्षेत्र हैं जहाँ ऑक्सीजन की कमी के कारण जलीय जीवन बाधित होता है।
- उच्च जल तापमान eutrophication के प्रभावों को और तेज कर देता है।
परीक्षण विधियों में सुधार की आवश्यकता
इस दीर्घकालिक समस्या को बनाए रखने में एक प्रमुख कारण है—पुरानी मिट्टी परीक्षण तकनीकें। ये विधियाँ अक्सर यह निर्धारित करने में विफल रहती हैं कि पौधे वास्तव में कितनी मात्रा में फॉस्फोरस तक पहुँच सकते हैं। विशेष रूप से जैविक पदार्थों से भरपूर मिट्टियों में, ये परीक्षण भ्रामक परिणाम देते हैं। वैज्ञानिक अब ऐसी नई विधियाँ विकसित कर रहे हैं जो पौधों की जड़ों के व्यवहार की बेहतर नकल करती हैं और प्रदूषण के जोखिम का सटीक मूल्यांकन करती हैं। इससे किसान लागत कम कर सकते हैं, उर्वरकों के अनावश्यक उपयोग से बच सकते हैं, और जल स्रोतों की रक्षा करते हुए उत्पादकता बनाए रख सकते हैं।
यह छिपा हुआ फॉस्फोरस प्रदूषण आधुनिक कृषि प्रणाली की एक ऐसी चुनौती है जिसे केवल वैज्ञानिक, आर्थिक और पारिस्थितिकीय संतुलन के ज़रिए ही हल किया जा सकता है।