मिजोरम का ‘बाना कैह’ अभियान: अदरक और झाड़ू की सीधी खरीदी से किसानों को राहत

मिजोरम का ‘बाना कैह’ अभियान: अदरक और झाड़ू की सीधी खरीदी से किसानों को राहत

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने घोषणा की है कि राज्य सरकार 2 फरवरी 2026 से किसानों से अदरक और सूखी झाड़ू (बूंस) की सीधी खरीदी शुरू करेगी। यह कदम राज्य की ‘बाना कैह’ (Bana Kaih) योजना के तहत उठाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों को समर्थन मूल्य पर फसल बेचने की गारंटी देकर बिचौलियों पर निर्भरता कम करना और कृषि‑आधारित विकास को सुदृढ़ करना है। यह घोषणा सैरांग (आइज़ोल से 21 किलोमीटर दूर) में अदरक प्रसंस्करण इकाई के उद्घाटन के अवसर पर की गई।

बाना कैह योजना: किसानों को सीधा समर्थन

‘बाना कैह’ राज्य सरकार की प्रमुख कृषि सहायता योजना है, जो किसानों को उनकी उपज के लिए घोषित समर्थन मूल्य देती है। इस योजना के तहत अदरक, हल्दी, मिर्च, झाड़ू (बroomstick) और धान की सीधी खरीद की जाती है।

  • योजना का उद्देश्य बाजार में मूल्य अस्थिरता से किसानों की रक्षा करना और उन्हें स्थायी आय का स्रोत प्रदान करना है।
  • सितंबर 2024 से लागू इस योजना ने किसानों और कृषि‑आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है।

मिजोरम: भारत की अदरक राजधानी

मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बताया कि मिजोरम अब भारत की ‘अदरक राजधानी’ के रूप में पहचाना जा रहा है — और यह मान्यता नीति आयोग द्वारा भी हाल ही में दी गई है।

  • यह मिजोरम के कृषि‑केंद्रित प्रयासों और किसानों की मेहनत का प्रमाण है।
  • पहले जहां मिजोरम की कोई फसल राष्ट्रीय पहचान नहीं बना सकी थी, वहीं अब अदरक उत्पादन ने इसे एक विशिष्ट कृषि राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है।

अदरक खरीदी का आर्थिक प्रभाव

  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अदरक की खरीदी पर ₹137.72 करोड़ खर्च किए गए, जिससे हजारों किसानों को प्रत्यक्ष आय प्राप्त हुई।
  • इसी अवधि में
    • 48,602.29 क्विंटल सूखी झाड़ू की खरीदी की गई (मूल्य लगभग ₹2 करोड़)
    • तथा 1,473 क्विंटल धान (मूल्य ₹44.18 लाख) की भी सीधी खरीद की गई।
  • यह दर्शाता है कि राज्य सरकार का हस्तक्षेप बाजार सुरक्षा और कृषि स्थायित्व की दिशा में प्रभावी रहा है।

UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • मिजोरम को भारत की अदरक राजधानी घोषित किया गया है (नीति आयोग)।
  • ‘बाना कैह’ योजना एक राज्य स्तरीय मूल्य समर्थन और बाजार गारंटी योजना है।
  • योजना के अंतर्गत अदरक, हल्दी, मिर्च, झाड़ू और धान जैसी फसलें शामिल हैं।
  • अदरक प्रसंस्करण इकाइयाँ मूल्यवर्धन में सहायक होती हैं और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करती हैं।

फसल विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने ‘सापथेई’ फल (Mizoram Apple) की खेती की भी चर्चा की और कहा कि राज्य सरकार इस फल की व्यवस्थित और बड़े स्तर पर खेती को बढ़ावा देगी।

  • यह कृषि आय के विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक और प्रयास होगा।
  • ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि फसल विविधीकरण, सुनिश्चित खरीदी और मूल्य स्थिरता उसकी कृषि नीति का मूल आधार रहेगा।

मिजोरम की यह पहल न केवल राज्य के किसानों के लिए स्थायी आय का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि यह अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कृषि क्षेत्र में अभिनव शासन मॉडल के रूप में भी एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

Originally written on January 17, 2026 and last modified on January 17, 2026.

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