मिज़ोरम में नई रीड स्नेक प्रजाति की खोज

मिज़ोरम में नई रीड स्नेक प्रजाति की खोज

भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मिज़ोरम में शोधकर्ताओं ने रीड स्नेक की एक नई प्रजाति की खोज कर राज्य की समृद्ध लेकिन अब तक कम-अन्वेषित जैव विविधता को एक बार फिर रेखांकित किया है। यह नई, गैर-विषैली सांप प्रजाति “Calamaria mizoramensis” के नाम से पहचानी गई है, जिसका नामकरण उसी राज्य के नाम पर किया गया है जहाँ यह पाई गई। यह खोज न केवल भारत में स्थानिक सरीसृपों की सूची को बढ़ाती है, बल्कि उत्तर-पूर्व के वनाच्छादित पहाड़ी क्षेत्रों के पारिस्थितिक महत्व को भी उजागर करती है।

खोज और वैज्ञानिक प्रकाशन

इस प्रजाति की खोज का नेतृत्व एच. टी. लालरेमसंगा ने किया, जो मिज़ोरम विश्वविद्यालय से जुड़े हैं। उनके साथ शोधकर्ता मलसावमदावंग्लियाना फनाई और रूस, जर्मनी तथा वियतनाम के वैज्ञानिकों ने सहयोग किया। इस महत्वपूर्ण खोज को 5 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय समकक्ष-समीक्षित पत्रिका Zootaxa में प्रकाशित किया गया। शोध के अनुसार यह प्रजाति “Calamaria” वंश से संबंधित है, जिसमें विश्वभर में अब तक 69 मान्य प्रजातियाँ दर्ज हैं।

गलत पहचान से नई प्रजाति तक का सफर

शोधकर्ताओं के अनुसार इस सांप के नमूने सबसे पहले वर्ष 2008 में मिज़ोरम विश्वविद्यालय परिसर में पाए गए थे। इसके बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से भी ऐसे नमूने मिले। लंबे समय तक इन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली एक व्यापक प्रजाति का हिस्सा माना जाता रहा, क्योंकि आनुवंशिक स्तर पर अंतर स्पष्ट नहीं था। हालांकि, एक दशक से अधिक समय तक एकत्र किए गए नमूनों पर किए गए विस्तृत डीएनए विश्लेषण से पता चला कि यह निकटतम ज्ञात प्रजातियों से 15 प्रतिशत से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न है, जो नई प्रजाति घोषित करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

आवास, व्यवहार और संभावित वितरण

“Calamaria mizoramensis” को रात्रिचर और अर्ध-भूमिगत जीवन शैली वाला सांप बताया गया है। यह आर्द्र, वनाच्छादित पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है, जहाँ ऊँचाई 670 से 1,295 मीटर के बीच होती है। दिलचस्प बात यह है कि इसके कुछ नमूने मानव बस्तियों के निकट, जैसे विश्वविद्यालय परिसर के आसपास भी मिले हैं। फिलहाल इसकी पुष्टि केवल मिज़ोरम से हुई है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी उपस्थिति मणिपुर, नागालैंड, असम और बांग्लादेश के चिटगांव क्षेत्र तक भी हो सकती है।

मिज़ोरम की बढ़ती हरपेटोफॉना सूची

इस अध्ययन के दौरान मिज़ोरम की उभयचर और सरीसृप प्रजातियों की एक अद्यतन सूची भी प्रस्तुत की गई। इसके अनुसार राज्य में कुल 169 प्रजातियाँ दर्ज हैं, जिनमें 52 उभयचर और 117 सरीसृप शामिल हैं। यह आंकड़ा मिज़ोरम को एक महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में स्थापित करता है और संरक्षण व आगे के अनुसंधान की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • “Calamaria mizoramensis” एक नई, गैर-विषैली रीड स्नेक प्रजाति है।
  • “Calamaria” वंश में विश्व स्तर पर 69 मान्य प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • नई प्रजाति की पहचान 15 प्रतिशत से अधिक डीएनए विचलन के आधार पर की गई।
  • Zootaxa प्राणीविज्ञान वर्गिकी से जुड़ी प्रमुख वैज्ञानिक पत्रिकाओं में से एक है।

इस खोज से स्पष्ट होता है कि उत्तर-पूर्व भारत के पहाड़ी वन क्षेत्र अब भी कई अज्ञात प्रजातियों का घर हो सकते हैं। मिज़ोरम में हुई यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय जैव विविधता के संरक्षण और सतत अनुसंधान की दिशा में भी एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

Originally written on January 7, 2026 and last modified on January 7, 2026.

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