मिग-29UPG में ASRAAM मिसाइल से बढ़ेगी भारतीय वायुसेना की ताकत

मिग-29UPG में ASRAAM मिसाइल से बढ़ेगी भारतीय वायुसेना की ताकत

भारतीय वायुसेना अपने मिग-29UPG लड़ाकू विमानों को एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (ASRAAM) से लैस करने जा रही है। यह कदम आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप वायुसेना की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे नजदीकी हवाई मुकाबलों (डॉगफाइट) में भारत की मारक क्षमता और प्रतिक्रिया समय दोनों में सुधार होगा।

ASRAAM का परिचय

ASRAAM एक अत्याधुनिक शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे यूरोपीय रक्षा कंपनी MBDA द्वारा विकसित किया गया है। यह मिसाइल विशेष रूप से तेज गति वाले हवाई मुकाबलों के लिए डिजाइन की गई है और फाइटर जेट्स को तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रदान करती है। इसकी सटीकता और उच्च कोण (ऑफ-बोरसाइट) पर लक्ष्य भेदने की क्षमता इसे बेहद प्रभावी बनाती है।

तकनीकी विशेषताएं और क्षमता

ASRAAM की लंबाई लगभग 2.9 मीटर और वजन करीब 88 किलोग्राम है। इसमें उच्च-विस्फोटक वारहेड और उन्नत इंफ्रारेड सीकर लगाया गया है। यह “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर आधारित है, जिससे पायलट मिसाइल लॉन्च करने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदल सकता है। यह मिसाइल मैक 3 से अधिक की गति प्राप्त कर सकती है और 25 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इसकी एयरोडायनामिक डिजाइन और शक्तिशाली प्रणोदन प्रणाली इसे उच्च गतिशीलता प्रदान करती है।

उन्नत संचालन विशेषताएं

ASRAAM की एक महत्वपूर्ण विशेषता ‘लॉक-ऑन आफ्टर लॉन्च’ (LOAL) क्षमता है, जिससे पायलट पहले मिसाइल लॉन्च कर सकता है और बाद में यह लक्ष्य को लॉक करती है। यह सुविधा युद्ध के दौरान अधिक लचीलापन प्रदान करती है। इसके अलावा, यह मिसाइल अत्यधिक G-फोर्स को सहन कर सकती है और अत्यधिक फुर्तीले दुश्मन विमानों को भी ट्रैक कर सकती है। इसकी हीट-सीकिंग तकनीक जटिल युद्ध परिस्थितियों में भी सटीक लक्ष्य भेदन सुनिश्चित करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ASRAAM एक शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे MBDA ने विकसित किया है।
  • यह इंफ्रारेड होमिंग तकनीक और “फायर एंड फॉरगेट” सिद्धांत पर काम करती है।
  • इसकी गति मैक 3 से अधिक और रेंज 25 किमी से ज्यादा है।
  • इसमें ‘लॉक-ऑन आफ्टर लॉन्च’ (LOAL) क्षमता मौजूद है।

भारतीय वायुसेना के लिए महत्व

मिग-29UPG विमानों में ASRAAM के एकीकरण से पुराने मिसाइल सिस्टम की जगह आधुनिक तकनीक आएगी, जिससे नजदीकी मुकाबलों में पहली बार हमला करने की क्षमता मजबूत होगी। यह मिसाइल पहले ही तेजस और जगुआर जैसे विमानों में इस्तेमाल की जा रही है, जो वायुसेना में आधुनिक हथियारों के मानकीकरण की दिशा को दर्शाता है।

अंततः, यह कदम भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाते हुए पुराने विमानों की उपयोगिता को बढ़ाने में सहायक होगा, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

Originally written on March 30, 2026 and last modified on March 30, 2026.

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