महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहिष्णुता का अंतरराष्ट्रीय दिवस: 2030 तक उन्मूलन की चुनौती
हर साल 6 फरवरी को ‘महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation – FGM) के खिलाफ शून्य सहिष्णुता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनियाभर में लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों के सबसे गंभीर उल्लंघनों में से एक को समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है। हालांकि पिछले कुछ दशकों में प्रगति हुई है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने चेताया है कि यदि प्रयासों को और तेज़ नहीं किया गया, तो 2030 तक FGM को समाप्त करने का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।
दुनिया में FGM की वर्तमान स्थिति
FGM आज भी 23 करोड़ से अधिक लड़कियों और महिलाओं को प्रभावित करता है। हर साल अनुमानित 45 लाख लड़कियाँ, जिनमें से कई पांच वर्ष से भी कम उम्र की होती हैं, इस प्रथा के खतरे में होती हैं। यदि वर्तमान प्रवृत्ति बनी रही, तो 2030 तक लगभग 2.27 करोड़ अतिरिक्त लड़कियाँ FGM का शिकार हो सकती हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि रोकथाम रणनीतियों में तीव्रता लाना समय की मांग है।
स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और मानवाधिकारों पर प्रभाव
FGM को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है और यह आजीवन शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। पीड़ित महिलाओं को प्रसव, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य में कठिनाइयों और मनोवैज्ञानिक आघात का सामना करना पड़ता है। इससे जुड़े स्वास्थ्य खर्च सालाना कम से कम 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचते हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
प्रगति को खतरे और हाल की चुनौतियाँ
हालांकि वैश्विक स्तर पर कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यह प्रगति अभी भी कमजोर और अस्थायी है। वित्त पोषण में कटौती, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में निवेश की कमी, FGM का चिकित्साकरण (medicalisation) और प्रथा के प्रति बढ़ती सामाजिक प्रतिरोध जैसी चुनौतियाँ मौजूदा प्रयासों को पीछे धकेल सकती हैं। बिना स्थिर वित्तीय सहायता के, सामुदायिक स्तर की रोकथाम योजनाएँ और पीड़ित सहायता सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- FGM को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन माना गया है।
- WHO FGM पर नैदानिक और रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देश जारी करता है।
- Medicalisation of FGM का अर्थ है — इस प्रथा का चिकित्सा पेशेवरों द्वारा किया जाना, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।
- FGM को समाप्त करना लैंगिक समानता (SDG 5) और स्वास्थ्य से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
WHO दिशा-निर्देश और बहु-क्षेत्रीय रणनीति
2025 में WHO और HRP ने FGM की रोकथाम और प्रबंधन पर नए वैज्ञानिक दिशा-निर्देश जारी किए। इसमें पीड़ित-केंद्रित देखभाल, FGM के चिकित्साकरण को रोकने, और स्वास्थ्य प्रणालियों की सशक्त प्रतिक्रिया पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि FGM को समाप्त करने के लिए समुदायों, धार्मिक एवं पारंपरिक नेताओं, शिक्षकों, मीडिया, कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की भागीदारी के साथ दीर्घकालिक और समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है।
2030 का लक्ष्य अब केवल चार वर्ष दूर है। ऐसे में स्थायी निवेश और ठोस सामूहिक प्रयास न केवल लाखों लड़कियों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, बल्कि अब तक हुई प्रगति को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य हैं।